नीति आयोग उपाध्यक्ष द्वारा आचार संहिता का उल्लंघन : चुनाव आयोग

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार के कांग्रेस की प्रस्तावित न्याय योजना पर दिए “राजनीतिक” बयान पर आपत्ति दर्ज की है। साथ ही इसे आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना है। आयोग ने कहा कि एक सरकारी नौकर को नासिर्फ अपने आचरण में तटस्थ रहना चाहिए बल्कि सार्वजनिक रूप से दिए जाने वाले बयानों में भी सतर्कता बरतनी चाहिए। लेकिन ऐसा राजीव कुमार के मामले में नहीं हुआ है।

शुक्रवार को नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार को भेजे एक पत्र में चुनाव आयोग ने उनके जवाब को संतोषजनक नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया। चुनाव आयोग ने दो टूक कहा कि उसने राजीव कुमार के जवाब को देखा और उसे उपयुक्त नहीं पाया है। साथ ही उन्हें भविष्य में ऐसे बयान जारी करने से बचने की हिदायत दी है। चुनाव आयोग ने राजीव कुमार को कहा है कि वह एक नौकरशाह हैं, इसलिए उन्हें ऐसे बयानों से बचना चाहिए चूंकि यह आचार संहिता का उल्लंघन है।

माना जाता है कि इसके जवाब में राजीव कुमार ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने इस योजना पर टिप्पणी एक अर्थशास्त्री होने के नाते ही की थी, एक नीति निर्माता निकाय से जुड़ाव के तौर पर नहीं। उन्होंने कहा था कि उनके बयान को नीति आयोग का रुख न समझा जाए।

विगत 27 मार्च को चुनाव आयोग ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष के बयान का संज्ञान लिया था। इस बयान में राजीव कुमार ने कांग्रेस की न्यूनतम आय गारंटी (न्याय) योजना की निंदा करते हुए टिप्पणी की थी। उल्लेखनीय है कि विगत 25 मार्च को एक प्रेस वार्ता में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बीस फीसद गरीब परिवारों के लिए इस योजना का एलान करते हुए कहा था कि ऐसे परिवारों को हर साल 72 हजार रुपये दिए जाएंगे।

राजीव कुमार ने विपक्षी दल कांग्रेस की न्याय योजना की आलोचना करते हुए कहा था कि कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए चांद दिलाने का वादा कर रही है। उन्होंने ट्वीट करके कहा था कि प्रस्तावित न्यूनतम गारंटी योजना आर्थिक परीक्षा, राजकोषीय अनुशासन परीक्षा और उसकी अनुपालन परीक्षा में भी फेल है। एक अन्य ट्वीट में कुमार ने दावा किया था कि कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से घोषित यह योजना वित्तीय अनुशासन को ध्वस्त कर देगी। इसके चलते काम के बदले बड़े वित्तीय लाभ देने होंगे और इसलिए इसे कभी भी लागू नहीं किया जा सकता है।

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