आखिर क्यों मुसलमानों को साधने में लगी है राजनीतिक पार्टियां ? जानें पूरी जानकारी

UP की सियासत की दूसरी सबसे बड़ी आबादी मुस्लिमों पर अब निगाहें सभी राजनीतिक दलों की टिकी हुई है

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के नज़दीक आने के साथ ही सियासी सरगर्मियां दिनों दिन तेज़ होती जा रही हैं. आबादी और विधानसभा की सीटों के लिहाज़ से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में ठंड बढ़ने का बादजूद सियासी पारा चढ़ा हुआ है. चुनाव में ग़रीबी, मंहगाई, बेराज़गारी, क़ानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर संप्रदायिक मुद्दों को हावी करने की लगातार कोशिशें हो रही हैं. सूबे की दूसरी बड़ी आबादी यानि मुसलमानों को खलनायक बनाकर पेश किया जा रहा है. जबकि सच्चाई ये है कि सूबे की सियासत में ये दूसरी बड़ी आबादी पूरी तरह हाशिए पर पहुंच चुकी है. किसी राज्य में कोई धार्मिक या जातीय समूह राजनीतिक रूप से कितना मज़बूत या कमज़ोर है, इसक अंदाज़ा विधानसभा और लोकसभा में उस समूह के प्रतिनिधित्व से लगाया जा सकता है.

ध्रुवीकरण होगा बीजेपी के लिए जीत की गारंटी

सवाल यह है कि आगामी चुनाव में ये आंकड़ा बढ़ेगा या और नीचे जाएगा? दरअसल मुस्लिम प्रतिनिधित्व का घटना-बढ़ना विधानसभा चुनाव में मतदातओं को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर निर्भर करेगा. किसी भी चुनाव में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बीजेपी के लिए जीत की गारंटी माना जाता है. अगर पिछले चुनाव की तरह इस बार भी इसी आधार पर मतदान हुआ तो बीजेपी प्रचंड बहुमत से जीतेगी. इस सूरत में विधानसभा में मुस्लिम प्रतिनिधित्व बढ़ने की गुंजाइश न के बराबर है. लेकिन अगर यूपी की जनता ने ग़रीबी, बेरोजगारी, मंहगाई, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सरकारी लापरवाही जैसे मुद्दों पर वोट डाले ले तो बीजेपी सत्ता विरोधी लहर की चपेट में आकर सत्ता से बाहर हो सकता है. इस सूरत में निश्चित तौर पर विधानसभा में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा.

मुसलमनों के वोट हासिल करने की हर मुमकिन कोशिश

जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, चुनावी हलचल तेज़ होती जा रही है. सभी दल अपने-अपने हिसाब से मुद्दे उछाल रहे हैं. नए-नए नारे आज़माए जा रहे हैं. बीजेपी के नेता मुसलमानों को चिढ़ाने वाले बयान दे रहे हैं. एसपी, बएसपी, कांग्रेस के साथ, आज़ाद समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी, मुसलमनों के वोट हासिल करने की हर मुमकिन कोशिश कर रही हैं. वहीं मुस्लिम नेतृत्व वाली कई पार्टियां भी ‘अपनी सियासत, अपनी क़यादत’ के नारे के साथ चुनावी मौदान में उतरने के लिए कमर कस रही हैं. हर चुनाव की तरह मुसलमान किसी एक के साथ जाने के बजाए अलग-अलग सीट पर जीत के समीकरणों के हिसाब से वोट करेगा. फिलहाल तो मुसलमान देखो और इंतेज़ार करो की नीति अपना कर सियासी चाल पर नज़र बनाए हुए है.

 

403 विधानसभा का क्या कहता है गणित

 

उत्तर प्रदेश की 403 सीटों वाली मौजूदा विधानसभा में कुल जमा 25 विधायक मुसलमान हैं. 24 विधायक 2017 के विधानसभा चुनाव में जीते थे और एक विधायक 2018 के उपचुनाव में जीता था. इनमें सबसे ज़्यादा 18 समाजवादी पार्टी के हैं. एसपी ने आम चुनाव में 47 सीटें जीती थीं. उसके 17 मुस्लिम विधायक जीते थे. बाद में 2018 में एसपी-बएसपी गठबंधन से एसपी का एक और विधायक जीत गया था. वहीं बहुजन समाज पार्टी के कुल 19 विधायकों में 5 मुस्लिम जीते थे. जबकि कांग्रेस के जीते 7 विधायकों में से 2 मुसलमान हैं.

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