आयकर छापों की रिपोर्ट आने पर राजनैतिक बयानबाजी शुरू

मध्यप्रदेश में आयकर छापों की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनैतिक बयानबाजी शुरू

भोपाल: मध्यप्रदेश में लगभग पौने दो वर्ष पहले तत्कालीन कमलनाथ सरकार के समय आयकर विभाग द्वारा प्रभावी लोगों के ठिकानों पर छापे संबंधी जांच रिपोर्ट केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और केंद्रीय निर्वाचन आयोग के माध्यम से राज्य सरकार के पास आवश्यक कार्रवाई के लिए पहुंचने की खबरों के बीच राजनैतिक बयानबाजी प्रारंभ हो गयी है।

2019 में की गयी छापेमारी

इस रिपोर्ट में लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान राज्य में बड़ी धनराशि के कथित लेनदेन का जिक्र करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के तीन अधिकारियों, राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी और अनेक प्रभावी नेताओं के नाम दर्ज होने की बात कही जा रही है। सीबीडीटी ने अप्रैल 2019 में की गयी छापे की कार्रवाई संबंधी जांच रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को भेजी थी और आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) के माध्यम से यह रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भेजी है।

निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देश

बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट राज्य सरकार तक पहुंच गयी है और उच्च स्तर पर इसका परीक्षण किया जा रहा है और इसे निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों के अनुरूप आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को सौंपे जाने को लेकर विचार चल रहा है। रिपोर्ट में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों और राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लिखने के बाद माना जा रहा है कि अब गेंद राज्य सरकार और इसकी जांच एजेंसियों के पास आ गयी है।

इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार फिर से केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी की मौजूदगी में दिग्विजय सिंह ने कहा कि निर्वाचन आयोग का कार्य निष्पक्ष तरीके से चुनाव संपन्न कराना है। लेकिन उसके द्वारा जिस तरह से वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है, उससे उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है।

छापे के दौरान कंप्यूटर में जानकारी

दिग्विजय सिंह ने कहा कि यदि छापे के दौरान कंप्यूटर में मिली जानकारी या कागजों में दर्ज नामों के आधार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाती है, तो इस तरह के अन्य मामलों में भी पहले कार्रवाई की जाना चाहिए। उन्होंने कुछ दस्तावेज पेश करते हुए आरोप लगाया और कहा कि इसी तरह लगभग सात आठ वर्ष पहले छापों के बाद कुछ कागज सार्वजनिक हुए थे। इनमें कुछ राज्यों के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों से संबंधित जानकारियां थीं।

सांसद ने जानना चाहा कि तो फिर उन मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हुयी। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाती है, तो पूर्व के मामलों में भी पहले प्राथमिकी दर्ज होना चाहिए।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि हमारी पार्टी के नेता किसी भी प्रकार की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हम लोग सड़क, विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा और अदालत में भी लड़ने के लिए तैयार हैं।

ई टेंडरिंग आदि मामलों की जांच

दिग्विजय सिंह ने कहा कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने 15 माह के शासनकाल के दौरान ई टेंडरिंग, सिंहस्थ, व्यापमं और अन्य मामलों की जांच शुरू की थी और इसी से घबराकर कमलनाथ सरकार गिरा दी गयी। यदि कमलनाथ सरकार पूरे पांच साल रहती तो वह इन सभी मामलों के दोषियों का न सिर्फ खुलासा करती, बल्कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाती। इसी से घबराकर भाजपा नेताओं ने सरकार गिरा दी और अब बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने ई टेंडर मामले की जांच शुरू की थी और निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट में जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा गया है, वे सभी ई टेंडर मामले की जांच से जुड़े थे।

तथ्यों के आधार पर कार्रवाई

इसके पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को यहां मीडिया से कहा था कि जैसे ही अधिकृत तौर पर रिपोर्ट या जानकारी आएगी, सरकार तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करेगी और इसमें जो भी दोषी होगा, उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी कल यहां मीडिया से कहा था कि ‘एप्रेजल रिपोर्ट’ आ चुकी है और इसमें सबके नामों के खुलासे हो चुके हैं। उन्होंने तत्कालीन कमलनाथ सरकार को सबसे भ्रष्ट सरकार भी बताया था और कहा था कि रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी। दोषी कोई भी होगा, उस पर कार्रवाई होगी।

मीडिया में आयी खबरों के अनुसार संबंधित जांच रिपोर्ट में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों सुशोभन बनर्जी, संजय माने और बी मधुकुमार के अलावा राज्य के कांग्रेस से जुड़े पूर्व मुख्यमंत्री, तत्कालीन कमलनाथ सरकार के कम से कम चार मंत्रियों, अनेक विधायकों और अन्य राजनेताओं के नाम दर्ज हैं।

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