अब गंगा को गंदा किया तो खैर नहीं

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देहरादून। गंगा की सफाई के लिये चल रहे अभियानों की कड़ी में एक और सख्ती जुड़ गयी है। गंगा में बिना ट्रीट किए सीवरेज छोड़ने वाले संस्थानों के खिलाफ उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नोटिस जारी किये हैं। इस नोटिस में उद्योगों, आश्रमों और धर्मशालाओं से कहा गया है कि किसी भी सूरत में गंगा में सीवरेज न डालें। हरिद्वार स्थित धर्मशालाओं और आश्रमों को सख्त हिदायत दी गई है कि सीवरेज जल निगम के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में ही पहुंचाएं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संस्थानों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था करने के लिए एक महीने का समय भी दिया है।

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तीन महीने का समय

इस बीच निर्माण कार्यों का मलबा गंगा में गिराने पर 15 जल विद्युत परियोजनाओं को भी नोटिस जारी किये गये हैं। इन परियोजनाओं की कई आवासीय कॉलोनियों का सीवरेज भी गंगा में डाला जा रहा है। परियोजनाओं को व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है। इसके अलावा हरिद्वार के आठ आश्रमों और धर्मशालाओं को नोटिस जारी कर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के निर्देश भी दिये गये हैं।

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बिना ट्रीटमेंट सीवरेज डालने पर होगी कार्रवाई

रुड़की समेत दो बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांटों को केंद्र सरकार से पर्यावरण स्वीकृति लेने के लिये भी कहा गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने 10 दिसंबर को निर्देश जारी किए थे कि गंगा में बिना ट्रीटमेंट सीवरेज डालने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाय। इसके बाद ट्रिब्यूनल की चैंबर मीटिंग में भी निर्देशों पर अमल शुरू करने के लिए शासन को हिदायतें दी गई थीं।

 

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