जानिए क्या है ‘polythene’ और इसके नुकसान

article-2606167-023DCB76000004B0-696_634x773लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश में पॉलीथिन पर रोक लगा दी गई है। पर्यावरण और सेहत के लिहाज से यह काफी अच्‍छा कदम है। क्‍योंकि पॉलीथिन बहुत नुकसानदेह है।

जानिए क्या है ‘polythene’ और इसके नुकसान

पॉलीएथिलीन या पॉलीथीन (Polyethylene या Polythene IUPAC नाम : पॉलीएथीन या पॉली (मेथीलीन)) सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला प्लास्टिक है। वर्तमान में इसका वार्षिक वैश्विक उत्पादन 8 करोड़ टन है। इसका मुख्य उपयोग पैकेजिंग (प्लास्टिक के थैले, प्लास्टिक फिल्में, जीओमेम्ब्रेन, बोतल और अन्य पात्र) बनाने में होता है।

पॉलीथीलीन कई प्रकार के होते हैं जिनमें से अधिकांश का सूत्र (C2H4)nH2 होता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि पॉलीथीन एक ही प्रकार के कार्बनिक यौगिकों का मिश्रण होता है। पॉलीइथिलीन एक बहुलक है। यह इथिलीन के अणु द्वारा बनता है। यह एक बहुउपयोगी पदार्थ है। बायोडिग्रेडेबल नहीं होने के कारण इससे भी पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।

गायों के पेट से निकलती है polythene

एससी यादव ने बताया लखनऊ के कान्हा उपवन में हर रोज तीन से छह गायों का पोस्टमार्टम होता है। इनमें कई के पेट में आठ किलो तक पॉलीथिन निकलती है। एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट, 2003 के तहत सूबे में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इसमें केवल 20 माइक्रोन से कम और 20 गुणा 30 वर्ग सेमी साइज से कम की पॉलीथिन ही प्रतिबंधित है। रंगीन पॉलीथिन को रिसाइकिल करने में पर्यावरण को खतरा होता है इसलिए इस पर भी प्रतिबंध है। वहीं खाने का सामान ले जाने के लिए पॉलीथिन बैग पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

स्वास्थ्य के लिए घातक है पॉलीथिन

पॉलीथिन कचरे से देश में प्रतिवर्ष लाखों पशु-पक्षी मौत का ग्रास बन रहे हैं। लोगों में तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं, जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है तथा भूगर्भीय जलस्रोत दूषित हो रहे हैं। प्लास्टिक के ज्यादा संपर्क में रहने से लोगों के खून में थेलेट्स की मात्रा बढ़ जाती है। इससे गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु का विकास रुक जाता है और प्रजनन अंगों को नुकसान पहुंचता है। प्लास्टिक उत्पादों में प्रयोग होने वाला बिस्फेनॉल रसायन शरीर में डायबिटीज व लिवर एंजाइम को असामान्य कर देता है। महाराजा अग्रसेन अस्पताल के सीईओ डॉ. एमएस गुप्ता का कहना है कि पॉलीथीन कचरा जलाने से कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड एवं डाईऑक्सीन्स जैसी विषैली गैसें उत्सर्जित होती हैं। इनसे सांस, त्वचा आदि की बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है।

पर्यावरण चक्र को कर देती है अवरुद्ध

पर्यावरण विशेषज्ञ रवि अग्रवाल के अनुसार, प्लास्टिक कचरे के जमीन में दबने की वजह से वर्षा जल का भूमि में संचरण नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप भूजल स्तर गिरने लगता है। नेशनल फिजिकल लैबोरेट्री के वैज्ञानिक विक्रम सोनी के अनुसार, प्लास्टिक कचरा प्राकृतिक चक्र में नहीं जा पाता, जिससे पूरा पर्यावरण चक्र अवरुद्ध हो जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके निगम का कहना है कि पॉलीथिन पेट्रो-केमिकल उत्पाद है, जिसमें हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल होता है। रंगीन पॉलीथिन मुख्यत: लेड, ब्लैक कार्बन, क्रोमियम, कॉपर आदि के महीन कणों से बनता है, जो जीव-जंतुओं व मनुष्यों सभी के स्वास्थ्य के लिए घातक है। पर्यावरण विशेषज्ञ चंदर कुमार सिंह कहते हैं कि मोटी पॉलीथिन में कार्बन और हाइड्रोजन की विशेष यूनिट होती है। यह ऐसा रसायनिक जोड़ है, जो टूट नहीं सकता। यही कारण है कि मोटा पॉलीथिन सड़ता नहीं है।

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