प्रकाश जावड़ेकर ने किया पुणे में ‘पहला बायोगैस संयंत्र’ का उद्घाटन, मल जलने की समस्या से मिलेगी निजात

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने किया पुणे में ‘पहला बायोगैस संयंत्र’ का उद्घाटन

पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बायोमास से संपिडित बायोगैस उत्पादन करने के लिए ‘देश के पहले वास्तविक बायोगैस प्रदर्शन संयंत्र का उद्घाटन किया’। यह एक ऐसी तकनीक है जो मलबे को खाद में बदलती है।

बायोगैस पर मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का ट्वीट

प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर कहा कि ‘सरकार दिल्ली और उत्तर भारत में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सभी कदम उठा रही है और हम उस दिशा में सभी संभव तकनीकी हस्तक्षेपों का उपयोग करेंगे’। वायु प्रदूषण को रोकने के लिए पुणे में एक प्रदर्शन संयंत्र शुरू किया है जो बायोमास से संपीड़ित बायोगैस का उत्पादन करता है।

उत्तर भारत में मल जलने की समस्या

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि ‘इस तरह की बायोगैस सुविधाओं से विशेष रूप से उत्तर भारत में मल जलने की समस्या से निजात मिलेगी’।

क्या होता है बायोगैस ?

बायोगैस मृत ऑर्गेनिज्म से बनता है, इसलिए यह वातावरण में कार्बन के स्तर को नहीं बिगाड़ती। बायोगैस जीवाश्म ईंधन के बजाय इसलिए भी बेहतर है क्योंकि यह सस्ता और नवीकृत ऊर्जा है।

मवेशियों के मल से तैयार बायोगैस

बायोगैस मवेशियों के मल को ‘कम ताप’ पर डाइजेस्टर में चलाकर माइक्रोब उत्पन्न करके प्राप्त की जाती है। जैव गैस में 75 प्रतिशत ‘मेथेन गैस’ होती है जो बिना धुँआ उत्पन्न किए जलती है। लकड़ी, चारकोल और कोयले के विपरीत यह जलने के बाद राख नहीं छोड़ती है। ग्रामीण इलाकों में भोजन पकाने और ईंधन के रूप में प्रकाश की व्यवस्था करने में इस बायोगैस का उपयोग होता है।

बायोगैस संयंत्र के लाभ

  • बायो गैस पर्यावरण के बहुत ही अनुकूल होता है और ग्रामीण क्षेत्रो के लिए बहुत उपयोगी है।
  • बायोगैस से खाना पकाने में लकड़ी का उपयोग कम होता है।
  • लकड़ी का उपयोग कम होने से हम पेड़ो की कटाई को आसानी से रोक सकते है।
  • बायो गैस के उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल जैसे- गोबर की आवश्यकता होती है जो आसानी से गाँवो से ही प्राप्त हो जाती है।
  • लकड़ी और गोबर के चूल्हे में बहुत धुआं निकलता है जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है। लेकिन बायो गैस के उपयोग से धुआं नहीं निकलता है जिससे स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों के रोकथाम में सहायता मिलती है।

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