RSS के कार्यक्रम में बोले प्रणब मुखर्जी, ‘घृणा से राष्ट्रवाद कमजोर होता है’

नागपुर। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस) के मुख्यालय में सरल शब्दों में भारत की बहुलतावादी संस्कृति का बखान किया। उन्होंने RSS काडर को बताया कि राष्ट्र की आत्मा बहुलवाद और पंथनिरपेक्षवाद में बसती है। पूर्वराष्ट्रपति ने प्रतिस्पर्धी हितों में संतुलन बनाने के लिए बातचीत का मार्ग अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने साफतौर पर कहा कि घृणा से राष्ट्रवाद कमजोर होता है और असहिष्णुता से राष्ट्र की पहचान क्षीण पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संवाद में भिन्न मतों को स्वीकार किया जाना चाहिए।

सांसद व प्रशासक के रूप में 50 साल के अपने राजनीतिक जीवन की कुछ सच्चाइयों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने महसूस किया है कि भारत बहुलतावाद और सहिष्णुता में बसता है।

उन्होंने कहा कि हमारे समाज की यह बहुलता सदियों से पैदा हुए विचारों से घुलमिल बनी है। पंथनिरपेक्षता और समावेशन हमारे लिए विश्वास का विषय है। यह हमारी मिश्रित संस्कृति है जिससे हमारा एक राष्ट्र बना है।

उन्होंने RSS मुख्यालय में यहां तीसरे सालाना प्रशिक्षण शिविर को संबोधित कर रहे थे। उनके इस शिविर में शिरकत करने का निमंत्रण स्वीकार किए जाने पर कांग्रेस और वामपंथी दलों ने आलोचना की है।

महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल के दर्शनों की याद दिलाते हुए मुखर्जी ने कहा कि राष्ट्रीयता एक भाषा, एक धर्म और एक शत्रु का बोध नहीं कराती है। उन्होंने अपना भाषण अंग्रेजी में दे रहे थे, मगर बीच-बीच में वह अपनी मातृभाषा बांग्ला के मुहावरों का इस्तेमाल भी कर रहे थे।

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