विकास से सबका स्तर उठना चाहिए : राष्ट्रपति

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हैदराबाद। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रविवार को कहा कि विकास तभी सार्थक होगा, जब इससे समाज के अंतिम पायदान पर मौजूद जरूरतमंद व्यक्ति का स्तर ऊंचा उठेगा। इंडियन इकॉनॉमिक एसोसिएशन (आईईए) के 98वें सालाना सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने रोजगार का प्रचुर अवसर पैदा किए जाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “देश की आबादी का बड़ा हिस्सा काम करने की उम्र वालों का है, इसलिए सरकार के लिए जरूरी है कि वह ऐसी नीति बनाए, जिसमें विकास के साथ रोजगार का भी सृजन हो।”

राष्ट्रपति ने कहा, “आज के युवा अवसरों का इंतजार नहीं करते, बल्कि उसका निर्माण करते हैं। स्टार्ट-अप की बढ़ती संख्या और उनकी सालाना आय इसका स्पष्ट प्रमाण है। सुंदर पिचई और सत्या नडेला जैसे लोग हैं, जो भारतीय शिक्षा प्रणाली से निकले हैं और वैश्विक कंपनियों के शीर्ष पदों तक पहुंचे हैं। इस तरह की रोजगारपरकता हमें भारतीय भूमि पर भी लानी है और यही अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं की अग्निपरीक्षा है।”

उन्होंने चिंता जताई कि हाल तक देश का एक भी विश्वविद्यालय दुनिया के प्रथम 200 विश्वविद्यालयों में शुमार नहीं था।

मुखर्जी ने कहा, “सम्मिलित प्रयासों और नीतिगत व्यवस्था के बाद अब यह संभव हुआ है कि हमारे दो संस्थान -भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरू और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली इस साल सितंबर में शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में शामिल हो पाए हैं।”

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