अवमानना केस में प्रशांत भूषण के पास माफी मांगने के लिए आखिरी दिन,वरना कोर्ट सुनाएगा फैसला

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने वरिष्ठ वक़ील प्रशांत भूषण को उनके द्वारा दिए गए बयानों की वजह से अदालत की अवमानना का दोषी माना है। ऐसे में उन्हें सोमवार तक का समय दिया गया था कि वो अदालत से बिना शर्त माफ़ी माँग लें। लेकिन प्रशांत भूषण ने माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया। आज यानी सोमवार को माफी मांगने के लिए दी गई समय सीमा का आखिरी दिन है। लोगों की नज़रें प्रशांत भूषण पर बनी हुई हैं कि आख़िर क्या होने वाला है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था, और प्रशांत भूषण को अपने दिए गए बयान पे सोचने के लिए समय दिया था, अदालत ने कहा था कि भूषण चाहें तो 24 अगस्त तक बिना शर्त माफ़ी माँग सकते हैं। अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो 25 अगस्त को अदालत इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगी।

प्रशांत भूषण ने माफी मांगने से किया इनकार

अदालत के फैसले पर प्रशांत भूषण ने कहा कि मुझे पीड़ा है कि मुझे अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया गया है। जिसकी महिमा मैंने दरबारी के रूप में नहीं बल्कि 30 सालों से एक संरक्षक के रूप में बनाए रखने की कोशिश की है। मैं सदमे में हूं और इस बात से निराश हूं कि अदालत इस मामले में मेरे इरादों का सबूत दिए बिना ही निष्कर्ष पर पहुंची है। उन्होंने महात्मा गांधी के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि मैं दया की अपील नहीं करता हूं। अदालत से जो भी सजा मिलेगी वो मुझे मंजूर है।

जानिये क्या था पूरा मामला

दरअसल कुछ दिन पहले  वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दो अलग-अलग ट्वीट किये थे। जिनमे मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे (CJI) और चार पूर्व न्यायाधीश को लेकर ट्वीट किया था।जहाँ उन्होंने जस्टिस बोबड़े के एक महंगी स्पोर्ट बैक पर बैठे हुए वायारल हुई तस्वीर की आधार पर उनकी आलोचना की थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशांत भूषण को नोटिस भेजा था, और जवाब माँगा था। जिसके बादक भूषण ने 140 पेज का जवाब भेजा था। जिसमे कहा कि सीजेआई की स्वस्थ आलोचना कोर्ट का अपमान नहीं है और ना ही इससे अदालत की गरिमा कम होती है। लेकिन कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया है जिस पर 20 अगस्त को सुनवाई हुई थी ।और फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब देखने वाली बात ये होगी की कोर्ट वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को क्या सजा सुनाती है।

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