Pre-mature delivery की वजह से बिगड़ रही है बच्चों की सेहत, climate change है बड़ी वजह

हर किसी को अब कम्फर्ट की आदत सी हो गई है। लेकिन उनके इस कम्फर्ट के चक्कर में पर्यावरण को कितना नुक्सान होता है इस बारे में कोई सोचना ही नहीं चाहता है। इंसानों की अगली पीढ़ी समय से पहले जन्म ले रही है। ऐसा क्यों हो रहा है इस बात का जवाब हम आपको देंगे।

नई दिल्ली : दुनिया भर में इंसानों की लाइफस्टाइल दिन प्रति दिन बदलती जा रही है। बढ़ती साइंटिफिक प्रोग्रेस के साथ लोगों का रहन-सहन भी भी उतनी ही तेज़ी से बदल रहा है। हर किसी को अब कम्फर्ट की आदत सी हो गई है। लेकिन उनके इस कम्फर्ट के चक्कर में पर्यावरण को कितना नुक्सान होता है इस बारे में कोई सोचना ही नहीं चाहता है। इंसानों की अगली पीढ़ी समय से पहले जन्म ले रही है। ऐसा क्यों हो रहा है इस बात का जवाब हम आपको देंगे।

ऐसा इसलिए हो रहा हैं क्योंकि इंसानों की गतिविधियों की वजह से पूरी दुनिया में हो रहा है क्लाइमेट चेंज (climate change) यानी पर्यावरण परिवर्तन। वैज्ञानिकों द्वारा की गई एक स्टडी के अनुसार पर्यावरण परिवर्तन के कारन ब्राज़ील (Brazil) के अमेज़न इलाके में प्री-मैच्योर बर्थ (Pre-mature birth) के मामले काफी ज़यादा बढ़ गए हैं। ये स्टडी 11 साल के बीच जन्मे 3 लाख बच्चों के ऊपर की गई है।

3 लाख बच्चों का हुआ समय से पहले जन्म

ब्रिटेन की लैंकास्टर यूनिवर्सिटी (Lancaster University) और FIOCRUZ हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट (FIOCRUZ Health Research Institute) के रिसर्चर्स ने मिलकर इसकी स्टडी की है। उनकी माने तो ब्राज़ील के अमेज़न इलाके में साल 2006 से 2007 तक करीब 3 लाख बच्चों का जन्म हुआ है। जब इन बच्चों की सेहत के बारे छानबीन हुई तो कुछ हैरान कर देने वाले खुलासे हुए।

वजन कम होने से सर्वाइव करने में होती है दिक्कत

दरअसल क्लाइमेट चेंज की वजह से बच्चों की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। बच्चों का जन्म के समय से पहले होने की वजह से वजन कम होता है, जिससे उन्हें सर्वाइव करने में दिक्कत होती है और कई बार तो ऐसा भी होता है कि अगर बच्चे ज़्यादा कमज़ोर हैं तो उनकी मृत्यु हो जाती है।

इस परेशानी की सबसे बड़ी वजह अत्यधिक बारिश को बताया जा रहा है। साथ ही ख़राब शिक्षा प्रणाली, स्वास्थय सुविधाएं और आर्थिक कमज़ोरी भी कही न
कहीं इसकी बड़ी वजह हैं। इस स्टडी को करने वाले रिसर्चर्स में से के ल्यूक पेरी ने बताय कि ब्राज़ील में क्लाइमेट चेंज की वजह से बढ़ी बारिश की वजह से मलेरिया जैसी बीमारिया जैसी घातक बीमारियां फ़ैल रही हैं। यही नहीं गर्भवती महिलाओं को मानसिक स्वास्थय संबंधी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है।

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Global Warming है समस्याओं की बड़ी जड़

साथ ही साथ आपको ये बताते चलें कि क्लाइमेट चेंज की वजह से ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) दिन प्रति दिन बढ़ती ही जा रही है। तापमान में जिस तरह से वृद्धि हो रही है उसके चलते यह समस्या और भी गंभीर रूप हो सकती है। गर्मी की वजह से गर्भवती महिलाओं में प्रसव सम्बन्धी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। इससे खतरा इतना बढ़ जाता है कि गर्भपात होने का भी दर रहता है। गर्मी के ही कारण समय से पहले प्रसव की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ये सारे मिलकर अजन्मे बच्चे और नवजात की सेहत पर असर डालते हैं।

लोग बदलते पर्यावरण के हिसाब से खुद को ढाल रहे हैं। लेकिन यह कोई समाधान नहीं हैं। पर्यावरण की पूरी साइकिल बदल चुकी है। कोई भी मौसम अब समयनुसार नहीं होता है। कभी अत्यधिक बारिश तो कभी सूखा, कभी अत्यधिक गर्मी तो कभी ठण्ड। अनुमान है कि इस सदी के अंत तक अमेरिका में हर 100 में से एक बच्चे का जन्म समय से पहले हो जायेगा। रिसर्चर्स का मानना है कि भारत जैसे विकासशील देशों में ग्लोबल वार्मिंग के और गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

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