गर्भवती को बिना सड़क के कुर्सी से अट्ठारह किमी दूर पैदल पहुचाया अस्पताल

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कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में कुल्लू जिले के शाक्टी गांव में अस्पताल न होने के कारण एक गर्भवती महिला को परिवार के लोगों ने 18 किलोमीटर तक कुर्सी पर बैठाकर पैदल चलकर अस्पताल पहुचाया। रविवार सुबह करीब दस बजे सुनीता देवी (27) को प्रसव पीड़ा शुरू हुई।

सुनीता के पति देवेंद्र कुमार ने यह सब गांव वालों की मदद से किया। देवेंद्र कुमार ने एक कुर्सी को लकड़ी के डंडों से बांध दिया और उस पर सुनीता को बैठाकर खड़े और उतराई वाले बर्फीले रास्ते से 18 किलोमीटर पैदल चलकर पांच घंटे बाद निहानी तक पहुंचाया। जहां से सुनीता को गाड़ी से सैंज अस्पताल उपचार के लिए पहुचाया गया।

मन जाता है कि पिछले डेढ़ महीने के भीतर इस तरह का यह चौथा मामला है। इसी के साथ ही गाड़ापारली पंचायत से दो और रैला पंचायत से महिला को भी कुर्सी में उठाकर सड़क तक पहुंचाया गया था। कुछ दिन पहले पोलियो की दवा पिलाने आई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की बर्फीले रास्ते में फिसलकर खाई में गिरने से मौत हो गई।

इतना सब होने के बाद भी सरकार और प्रशासन खामोश हैं। सुनीता के पति देवेंद्र कुमार, पंचायत प्रधान भाग चंद, उप प्रधान गोपाल आदि ने कहा कि आजादी के 73 साल बाद भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

इसके साथ ही सैंज घाटी के दूरस्थ गांव शुगाड़, शाक्टी, मरौड और कुटला को सड़क भी नसीब नहीं हुई है। लोग मरीजों को ही नहीं, अपनी रोजमर्रा की वस्तुओं को भी पीठ पर उठाकर लाने को मजबूर हैं। इन गांवों में सड़क, मोबाइल नेटवर्क और अस्पताल तक नहीं है।

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