राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बावजूद कोविंद रह गए सबसे पीछे, क्या ख़त्म हो रही मोदी लहर?

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नई दिल्ली: बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविंद अब देश के राष्ट्रपति बन गए हैं। 24 जुलाई को प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और 25 जुलाई को कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ भी ग्रहण कर लेंगे। लेकिन इस चुनाव में भाजपा के इस उम्मीदवार को मोदी लहर का उस तरह फायदा नहीं मिला है जैसा की वर्ष 2014 में हुए आम चुनाव से लेकर अभी तक हुए कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिला है। जी हां, कई राजनीतिक विशेषज्ञ इसे नरेंद्र मोदी की आंधी से भी जोड़ कर देख रहे हैं। इन विशेषज्ञों का कहना है कि कोविंद मोदी लहर में देश के राष्ट्रपति तो बन गए लेकिन इस चुनाव से लगता है कि देश में मोदी के आंधी की रफ़्तार में कमी आई है।

प्रणब मुखर्जी

दरअसल, देश के 14वें राष्ट्रपति के चयन के लिए हुए चुनाव में रामनाथ कोविंद ने जीत जरूर दर्ज की है लेकिन अगर उनके वोट प्रतिशत को देखें तो वह प्रणब मुखर्जी को मिले वोट प्रतिशत से पीछे रह गए हैं। केवल प्रणब की नहीं उनको मिले वोटों की सख्या वर्ष 1974 से अब तक का सबसे कम है।

राजग के उम्मीदवार रामनाथ ने राष्ट्रपति चुनाव में कुल 10,90,300 में से 7,02,044 मत प्राप्त किए। वहीं उनकी प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार मीरा कुमार को 3,67,314 मिले। इस हिसाब से निर्वाचित उम्मीदवार को 65.65 प्रतिशत मत मिले।

वहीं वर्ष 2012 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (सप्रंग) का समर्थन प्राप्त प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति चुनाव में 7,13,763 वोट हासिल किये थे और उनके प्रतिद्वंदी राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन (राजग) का समर्थन प्राप्त पीए संगमा को 3,15, 987 वोट मिले थे।

इससे पहले वर्ष 2012 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब मुखर्जी ने 69.31 फीसदी वोट हासिल किए थे। केवल इतना ही नहीं, उसके पहले भी प्रतिभा पाटिल ने 65.82 प्रतिशत, अब्दुल कलाम ने 89.57 प्रतिशत और केआर नारायणन ने 94.97 प्रतिशत वोटों के साथ जीत हासिल की थी जो कोविंद को मिले वोटों से ज्यादा है।

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