रायसीना हिल्‍स में प्रणब मुखर्जी का आखिरी दिन, पीएम समेत सभी सांसद देंगे फेयरवेल

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नई दिल्ली। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी का रायसीना हिल्‍स में रविवार को आखिरी दिन है। पीएम मोदी समेत सभी सांसद उनको फेयरवेल देंगे। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी का फेयरवेल संसद के सेंट्रल हॉल में होगा। इससे पहले शनिवार को पीएम मोदी ने राष्‍ट्रपति के सम्‍मान में एक डिनर का आयोजन किया था।

राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी का फेयरवेलराष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी का फेयरवेल होगा कुछ हटकर

प्रणब मुखर्जी ने पांच साल पहले 2012 में राष्‍ट्रपति का पद संभाला था। पूरे कार्यकाल में उन्‍होंने कई मुद्दों पर अपनी मिसाल कायम की। एक शिक्षक से नेता और उसके बाद राष्ट्रपति तक का सफर तय करने वाले प्रणब मुखर्जी अपने शालीन व्यक्तिव और विद्वता के लिए जाने जाते हैं।

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केंद्र सरकार से नहीं आई टकराव की स्थिति

राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी बहुत ही शांत स्‍वभाव के वयक्ति हैं। उनका कार्यकाल कभी भी विवादों में नहीं रहा। पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम के दौरान प्रणब मुखर्जी को विता समान बताया था।

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पश्चिम बंगाल से रायसीना हिल्स तक का सफर

प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 में पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुआ था।  1969 से वो लगातार पांच बार राज्यसभा के सांसद चुने गए। 1997 में वो सबसे उत्कृष्ट सांसद चुने गए। साल 2004 में उन्होंने पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रखा और लोकसभा में चुनकर पहुंचे इसके बाद 2009 में भी लोकसभा सांसद चुने गए।

गांधी परिवार के काफी करीबी थे

कांग्रेस में उनका कद काफी बड़ा था और वो गाँधी परिवार के बेहद करीबी रहे। राष्ट्रपति बनने से पहले तक प्रणब मुखर्जी केंद्र सरकार में वित्त मंत्री रहे। वित्त मंत्री के अलावा प्रणब दा विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री जैसे अहम मंत्रालयों को भी संभाल चुके हैं।

इन कामों की वजह से याद किए जाएंगे प्रणब दा

राष्ट्रपति पद पर रहने के दौरान उन्होंने ऐसे कई काम किए जो अमिट छाप छोड़ जाएंगे प्रणब मुखर्जी ने ही राष्ट्रपति और राज्यपाल के संबोधन से पहले महामहिम लगाने की परंपरा को खत्म किया। प्रधानमंत्री के अनुरोध पर उन्होंने शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति भवन परिसर में बने स्कूल में छात्रों को पढ़ाया भी। साथ ही राष्ट्रपति भवन मे एक संग्रहालय का भी निर्माण करवाया, जहां आम लोग अपनी इस विरासत को देख सकते हैं।

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