राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले- ‘हमारी Lower Judiciary देश की न्यायिक व्यवस्था का आधारभूत अंग’

जबलपुर में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ऑल इंडिया स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमीज डायरेक्टर्स रिट्रीट कार्यक्रम में शामिल हुए

जबलपुर: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) ऑल इंडिया स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमीज डायरेक्टर्स रिट्रीट (All India State Judicial Academies Directors Retreat Program) कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उनके साथ मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे।

‘संस्‍कारधानी’ सम्मान

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ऑल इंडिया स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमीज डायरेक्टर्स रिट्रीट कार्यक्रम में  बोला कि शिक्षा, संगीत एवं कला को संरक्षण और सम्मान देने वाले जबलपुर (Jabalpur) को आचार्य विनोबा भावे ने ‘संस्‍कारधानी’ (Conservation) कहकर सम्मान दिया और वर्ष 1956 में स्थापित मध्‍य प्रदेश उच्‍च न्‍यायालय की मुख्य न्यायपीठ ने जबलपुर को विशेष पहचान दी।

मुझे यह देखकर प्रसन्नता होती है कि न्‍याय व्यवस्था में तकनीक का प्रयोग बहुत तेजी से बढ़ा है। देश में 18,000 से ज्यादा न्यायालयों का कंप्‍यूटरीकरण (Computerization) हो चुका है। लॉकडाउन (Lockdown) की अवधि में जनवरी, 2021 तक पूरे देश में लगभग 76 लाख मामलों की सुनवाई वर्चुअल कोर्ट्स में की गई।

मध्‍य प्रदेश सहित पश्चिमी भारत की जीवन रेखा और जबलपुर को विशेष पहचान देने वाली पुण्य-सलिला नर्मदा की पावन धरती पर, आप सबके बीच आकर मुझे प्रसन्‍नता हो रही है।

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न्यायिक व्यवस्था

राष्ट्रपति ने बोला कि हमारी Lower Judiciary, देश की न्यायिक व्यवस्था का आधारभूत अंग है। उसमें प्रवेश से पहले, सैद्धांतिक ज्ञान रखने वाले Law Students को कुशल एवं उत्कृष्ट न्यायाधीश के रूप में प्रशिक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य हमारी न्यायिक अकादमियां कर रही हैं। अब जरूरत है कि देश की अदालतों, विशेष रूप से जिला अदालतों में लंबित मुकदमों को शीघ्रता से निपटाने के लिए न्यायाधीशों के साथ ही अन्य Judicial एवं Quasi-Judicial अधिकारियों के प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाया जाए।

न्याय के आसन पर बैठने वाले व्यक्ति में समय के अनुसार परिवर्तन को स्‍वीकार करने, परस्‍पर विरोधी विचारों या सिद्धांतों में संतुलन स्‍थापित करने और मानवीय मूल्‍यों की रक्षा करने की समावेशी भावना होनी चाहिए। न्यायाधीश को किसी भी व्यक्ति, संस्था और विचार-धारा के प्रति, किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह तथा पूर्व-संचित धारणाओं से सर्वथा मुक्त होना चाहिए। न्याय करने वाले व्यक्ति का निजी आचरण भी मर्यादित, संयमित, सन्देह से परे और न्याय की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला होना चाहिए। मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं कि मुझे राज्य के तीनों अंगों अर्थात् विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका– से जुड़कर देश की सेवा करने का अवसर मिला।

न्‍याय व्‍यवस्‍था का उद्देश्‍य केवल विवादों को सुलझाना नहीं, बल्कि न्‍याय की रक्षा करने का होता है और न्याय की रक्षा का एक उपाय, न्याय में होने वाले विलंब को दूर करना भी है।

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