राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पहली बार देखा गंगा आरती का अद्भूत नजारा, खोदाई में निकले यज्ञकुंड

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का तीन दिवसीय दौरा है। सबसे पहले राष्ट्रपति वाराणसी पहुंचे जहां पर उन्होंने दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती की

उत्तर प्रदेश: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल वाराणसी के दशाश्वमेध घाट (Dashashwamedh Ghat) में गंगा आरती में शामिल हुए। जिसके बाद गंगा आरती का अद्भूत और अलौकिक नजारा देखकर रामनाथ कोविंद मंत्रमुग्ध हो गए। क्योंकि इससे पहले राष्ट्रपति ने गंगा आरती का भव्य नजारा नहीं देखा था।

पूर्वांचल में तीन दिवसीय दौरा

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के तीन दिवसीय दौरे की शुरूआत वाराणसी से हुई है। राष्ट्रपति सबसे पहले बाबा विश्वनाथ जी की पावन धरा पर पहुंचे। जहां पर उनका स्वागत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। जिसके बाद राष्ट्रपति कोविंद ने वाराणसी में दशाश्वमेध घाट पर मां गंगा की आरती में भाग लिया।

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खोदाई में निकले यज्ञकुंड

दशाश्वमेध घाट, वाराणसी में गंगातटवर्ती प्रसिद्ध स्थान है जिसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। काशीखंड के अनुसार शिवप्रेषित ब्रह्मा ने काशी में आकर यहीं दस अश्वमेध यज्ञ किए। शिवरहस्य के अनुसार यहां पहले रुद्रसरोवर था परंतु गंगागमन के बाद पूर्व गंगापार, दक्षिण दशहरेश्वर, पश्चिम अगस्त्यकुंड और उत्तर सोमनाथ इसकी चौहद्दी बनी। यहां प्रयागेश्वर का मंदिर है। काशीप्रसाद जायसवाल के मत से भारशिवों राजभर ने जिस स्थान पर दस अश्वमेघ किए वह यही भूमि है। सन् 1929 में यहां रानी पुटिया के मंदिर के नीचे खोदाई में अनेक यज्ञकुंड (Yajnakund) निकले थे। त्रितीर्थी में यहां स्नान करना अनिवार्य है।

 

गंगा आरती

गंगा आरती (Ganga Aarti), गंगा नदी में प्रार्थना करने की रस्म है। प्रतिदिन शाम को आयोजित की जाती है। कई पुजारी इस अनुष्ठान को गहनता से करते हैं और इसे भजन की एक लयबद्ध धुन में गंगा आरती करते हैं। मंगलवार और धार्मिक त्योहारों पर विशेष आरती होती है।

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