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हिंदी के आधुनिक तुलसी डॉ. Narendra Kohli का सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल में हुआ निधन

नई दिल्ली : हिंदी के मशहूर राइटर डॉ. Narendra Kohli का शनिवार को निधन हो गया है। उन्होंने शाम 6 बजकर 40 मिनट पर दिल्ली के सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल में अपनी आखिरी सांस ली। जानकारों की माने तो वह कोरोना पॉजिटिव थे।

साँस लेने में तकलीफ होने के बाद शुक्रवार को उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। वह कुछ ही दिनों पहले संस्कार भारती के ‘कला संकुल’ के उद्घाटन में भी शामिल हुए थे।आपकी जानकारी के लिए बताते चलें डॉ. नरेंद्र कोहली ने अपनी पहली कहानी 1960 में लिखी थी।  पिछले कई दशक से वाणी पब्लिकेशन हाउस से जुड़े डॉ. कोहली अब तक 92 के करीब किताबें लिख चुके थे।

हिंदी को दिए बेशकीमती योगदान के लिए डॉ. Kohli को पद्म भूषण पुरस्कार से नवाज़ा गया था

6 जनवरी 1940 को पाकिस्तान के सियालकोट में जन्मे डॉ. नरेंद्र कोहली को पद्म भूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। उन्होंने अहल्या, युद्ध, वासुदेव और अभ्युदय जैसी कई मशहूर किताब लिखीं थीं। उन्हें अपने लेखक होने पर गर्व था। एक बार उन्होंने कहा था कि मुझे सचिन तेंदुलकर न बन पाने का अफसोस नहीं है, क्योंकि मुझे पता है कि तेंदुलकर कभी नरेंद्र कोहली नहीं बन सकते हैं। उनका मानना था की किसी को राइटर बनाया नहीं जा सकता, राइटर जन्म से राइटर होते हैं।

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सेंट्रल कल्चरल मिनिस्टर प्रहलाद सिंह पटेल ने नरेंद्र कोहली के निधन पर शोक ज़ाहिर करते हुए कहा की जैसे समुद्र मंथन से अमृत निकला था, इस तरह ही स्वर्गी नरेंद्र कोहली जी ने अपने कलम से इस नई युवा पीढ़ी को प्रसाद दिया। मैं सेतुबंध, सांस्कृतिकमंथन के पुरोधा को नमन कर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

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