राम मंदिर के लिए प्रधानमंत्री मोदी का ‘राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट’ का ऐलान

बीते साल 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, लेकिन ट्रस्ट का निर्माण न हो पाने के कारण अभी तक मंदिर निर्माण का कार्य अधर में लटका हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्र की कैबिनेट मीटिंग होने वाली है. जिसमें राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के गठन को मंजूरी दी जा सकती है.

इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट बनाने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को दी थी, इसके लिए तीन महीने का समय का समय दिया गया था. अब आने वाली 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की दी हुई मोहलत अब ख़त्म हो रही है.

क्या है राम मंदिर ट्रस्ट की भूमिका-

आपको बता दें कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाले खर्च की पूरी निगरानी मंदिर निर्माण ट्रस्ट करेगा. निर्माण को लेकर वित्तीय शक्तियां ट्रस्ट के पास होंगी. केंद्र सरकार इस ट्रस्ट के लिए संसद में बिल भी ला सकती है.

क्या हैं राम मंदिर ट्रस्ट की चुनौतियां-

केंद्र द्वारा निर्मित राम मंदिर ट्रस्ट का सबसे अहम् काम ये होगा कि वो ट्रस्ट के सदस्यों के बीच तालमेल बिठाने का काम होगा. सदस्य बनाने को लेकर मतभेद को दूर करना भी इस ट्रस्ट का काम होगा. राम मंदिर ट्रस्ट में शामिल होने के दावेदारों की लंबी लिस्ट भी इसी में शामिल है.

जानिए कौन कौन शामिल है राम मंदिर ट्रस्ट में-

मंदिर निर्माण ट्रस्ट में मंदिर आंदोलन से जुड़े लोग ज्यादा संभव की सदस्यता संभव हो सकती है.  ट्रस्ट में चारों मठों के शंकराचार्य शामिल हो सकते हैं. राम मंदिर ट्रस्ट में 11 से 15 सदस्य हो सकते हैं. ट्रस्ट के अध्यक्ष की भूमिका महंत नृत्य गोपाल दास को सौंपी जा सकती है. अध्यक्ष चंपत राय को इस ट्रस्ट में अहम पद मिल सकता है, जबकि इसके संरक्षक मंडल में पीएम, गृहमंत्री शामिल हो सकते हैं

Related Articles