प्रधानमंत्री कार्यालय हुआ बेहद गंभीर MTNL व BSNL को संकट से उबारने के लिए

सरकारी टेलीकॉम कंपनियों एमटीएनएल व बीएसएनएल को वर्तमान दुर्दशा से उबारने की कोशिशों के प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) बेहद गंभीर दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक दोनों कंपनियों को उबारने के लिए गठित एक उच्च-स्तरीय पैनल से पीएमओ ने स्पष्ट करने को कहा है कि इन्हें लाभकारी हालत में लाया जा सकता है या नहीं, और अगर यह संभव है तो इसे कैसे अंजाम दिया जाएगा।

यह निर्देश तब आया है, जब दोनों कंपनियों के पुनरुद्धार के लिए दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा भेजे एक प्रस्ताव पर वित्त मंत्रालय ने आपत्तियां जताईं। उससे पहले दूरसंचार विभाग द्वारा पेश पुनरुद्धार योजना को गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाला मंत्रिसमूह मंजूरी दे चुका था। अधिकारी ने कहा कि प्रधान सचिव पीके मिश्र की अध्यक्षता वाले पीएमओ पैनल ने पिछले सप्ताह बैठक के दौरान पूछा था कि महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) और भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) का पुनरुद्धार हो सकता है या नहीं।

पैनल ने इन सवालों का जवाब खोजने के लिए सचिवों की एक समिति का गठन किया हुआ है। इस समिति में टेलीकॉम सचिव अंशु प्रकाश के अलावा सार्वजनिक उपक्रम विभाग (डीपीई), नीति आयोग, निवेश व लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के अधिकारी शामिल हैं। यह समिति इसी सप्ताह रिपोर्ट सौंप सकती है।

गौरतलब है कि अमित शाह की अध्यक्षता में गठित मंत्रिसमूह में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तथा दूरसंचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद भी शामिल हैं। इस मंत्रिसमूह ने जुलाई के मध्य में ही दूरसंचार विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। लेकिन बाद में वित्त मंत्रलय ने प्रस्ताव पर 80 से ज्यादा आपत्तियां जाहिर कीं।

यह है योजना

दूरसंचार विभाग ने बीएसएनएल के पुनरुद्धार के लिए 74,000 करोड़ रुपये की योजना पेश की है, क्योंकि कंपनी को बंद करने से सरकार को करीब 95,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। पुनरुद्धार योजना में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के मद में 29,000 करोड़ रुपये, 4-जी स्पेक्ट्रम के मद में 20,000 करोड़ रुपये और इस सेवा को परिचालन में लाने और चलाते रहने के लिए 13,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।

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