पुलवामा हमला : शहीद अजय के पिता बोले, आतंकी को देखते ही मारो गोली

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उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के बासा टीकरी गांव के लाल अजय कुमार पुलवामा में रविवार रात आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए। उनकी शहादत पर मेरठ के लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। गम में डूबे शहीद के गांव में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए। शहीद अजय के पिता वीरपाल भी गम और गुस्से में हैं। वीरपाल कहते हैं कि सरकार को तत्काल कश्मीर से धारा 370 हटानी चाहिए। फौज को खुली छूट दी जाए। आदेश दें पत्थरबाजों और आतंकियों को देखते गोली मार दी जाए। वीरपाल ने कहा बार्डर पर उनका बेटा अकेला नहीं था। देश के और भी किसानों-मजदूरों के बेटे बार्डर पर हैं।

बासा टीकरी के शहीद अजय 20 ग्रेनेडियर में नियुक्त हुए थे। लंबे समय तक उनके पिता ने भी 20 ग्रेनेडियर की सेवा की। इन दिनों अजय 55 राष्ट्रीय राइफल्स में जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। वीरपाल सिंह कहते हैं कि हमारे नेता कमजोर हैं। उन्हें वोट चाहिए, वरना वहां से 370 क्यों नहीं हटा ली जाती। फौज को खुली छूट क्यों नहीं दी जाती। फौज वहां बेबस है और पत्थरबाज पत्थर बरसा रहे हैं। आखिर नेताओं के बेटे तो बार्डर पर नहीं जाते फिर वह कड़े फैसले क्यों लेंगे। वीरपाल कहते हैं कि फौज को एक्शन की आजादी मिलनी चाहिए। आतंकी चाहे कश्मीरी हो, पाकिस्तानी हो या फिर अफगानी या फिर पत्थरबाज देखते ही गोली मारने की छूट देनी चाहिए।

चार के बदले दुश्मन के 40 सिर दे सरकार 

अजय के पिता वीरपाल ने कहा बेटे की शहादत पर गर्व है, लेकिन कब तक हमारे सैनिकों के शव आते रहेंगे। सरकार को चार के बदले चालीस आंतकियों को मार गिराना चाहिए। अजय की मां का कहना है कुछ भी हो जाए, लेकिन मेरे बेटे की शहादत बेकार नहीं जानी चाहिए। वीरपाल सिंह का कहना है वह अपने पोते आरव को भी सेना में भेजेंगे।

बहन बोली, भाई की शहादत का बदला चाहिए 

जानी। शहीद अजय की बहन अर्चना ने कहा वह प्रधानमंत्री से मांग करती हैं सेना को आतंकियों और पाकिस्तानियों से निपटने की खुली छूट दी जाए। वह चाहती हैं सरकार उनके भाई की शहादत का बदला आतंकियों को खत्म करके ले। अजय, विजय और अर्चना तीन भाई-बहन थे। अजय शहीद हो गए। विजय भी अब दुनिया में नहीं हैं। बहन अर्चना विवाहित हैं। वह भाई के चले जाने से बेहद गमजदा हैं। अर्चना कहती हैं कि कश्मीर वाले पत्थरबाजी करते हैं और वही पाकिस्तानी आतंकियों को अपने घरों में रोकते हैं।

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