Farmer’s Protest से बदल सकता है पंजाब का राजनीतिक समीकरण

जिस प्रकार राजनैतिक दलों (Political Parties) के साथ-साथ सामान्य नागिरक भी किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, उससे पंजाब में राजनैतिक समीकरण बदल सकता है।

वेरका : केन्द्र सरकार (Central Government) द्वारा पारित तीन कृषि सुधार कानूनों का किसानों द्वारा लंबे समय से चल रहे विरोध का सामान्य नागरिकों पर भी खासा असर दिखाई देने लगा है। किसान आंदोलन (Farmers Protest) का जिस प्रकार राजनैतिक दलों (Political Parties) के साथ-साथ सामान्य नागिरक भी समर्थन कर रहे हैं, उससे आने वाले समय में पंजाब (Punjab) में राजनैतिक समीकरणों में भी बदलाव आ सकता है।

किसान संगठन संयुक्त तौर पर बना सकते है राजनैतिक दल

डीएवी कॉलेज के प्रो दरबारा सिंह के नेतृत्व में आज वेरका के नागरिकों ने क्रमवार भूख हड़ताल आरंभ की है। प्रो दरबारा सिंह ने बताया कि कृषि कानूनों के विरोध में वेरका के लोगों ने रिलायंस की लगभग एक हजार मोबाइल सिम कार्ड तोड़ कर सड़कों पर फेंक दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पंजाब , हरियाणा, केरल और अन्य राज्यों के किसान संगठन एक साथ दिल्ली में इक्टठे हुए हैं, उससे लगता है कि आने वाले समय में किसान संगठनों द्वारा संयुक्त तौर पर राजनैतिक दल बनाने की भी उम्मीद है।

किसान आंदोलन (Farmers Protest) तक ही नहीं सीमित रहेगा नागरिकों का गुस्सा

उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन (Farmers Protest) से उपजे नागरिकों का गुस्सा  केवल कृषि कानूनों तक ही सीमित नहीं रहेगा। बल्कि यह विरोध अब बढ़ कर ईवीएम मशीन, रिलायंस पेट्रोल पंप (Reliance Petrol Pump) और कार्पोरेट घरानों (Corporate houses) के खिलाफ भी होगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के घरों या अन्य भवनों पर रिलायंस कम्युनिकेशनस के टावर लगे हैं, वे भी इन टावरों को बंद करवाने के लिए राजी हो गए हैं। इन लोगों ने टावरों को बंद करवाने के लिए दो दिन का समय मांगा है।

इसे भी पढ़े:कोरोना वायरस ( COVID-19 ) की चपेट में आए मोदी सरकार के केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री

प्रो.सिंह ने कहा कि कोरोना (Covid-19) की आढ़ में भ्रष्टाचार (Corruption) को बढ़ावा मिल रहा है। लोकतंत्र (Democracy) पर अफसरशाही (Bureaucracy) हावी है। उन्होंने कहा कि देश में अभी तक अंग्रेजों के बनाए हुए कानून ही लागू हैं। जिन्हे बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार केन्द्र सरकार (Central Government) निजीकरण (Privatization) का बढ़ावा दे रही है, उससे देश एक बार फिर से कार्पोरेट घरानों का गुलाम हो जाएगा।

Related Articles

Back to top button