‘पुरानी हवेली’ और ‘वीराना’ के निर्देशक श्‍याम रामसे का निमोनिया से हुआ निधन

80 और 90 के दशक में दर्शकों को अपनी हॉरर फिल्मों से डराने वाले श्याम रामसे का बुधवार को यहां एक अस्पताल में सुबह निधन हो गया। 67 वर्षीय श्याम रामसे न्यूमोनिया से पीड़ित थे।काफी दिनों से अंधेरी के कोकिलाबेन हॉस्पिटल में भर्ती थे और वहीं उन्होंने अपनी आंखिरी सांसें लीं| इस बात की जानकारी खुद श्याम रामसे के भतीजे अमित ने दी है|

उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए एक प्रशंसक ने लिखा, रेस्ट इन पीस श्याम रामसे जी। आप और आपके परिवार की कहानी प्रेरणादायक है, जिस तरह से आपके पूरे परिवार ने साथ मिलकर हिंदी सिनेमा को एक नई शैली हॉरर दी, उससे इंडस्ट्री में कई लोग प्रेरित हैं कि किस तरह से किसी ऐसी चीज पर काम करना चाहिए जिस पर बेशक यकीन किया जाता है।

श्याम ने 1972 में बॉलीवुड की पहली हॉरर फिल्म ‘दो गज जमीन के नीचे’ बनाई थी। उन्होंने कई हॉरर फिल्मों का निर्माण किया है। जिनमें ‘दरवाजा’, ‘पुराना मंदिर’ और ‘वीराना’, ‘पुरानी हवेली’, ‘तहखाना’ जैसी फिल्में हैं। श्याम रामसे अपनी हिट हॉरर फिल्म ‘वीराना’ का सीक्वेल बनाने की तैयारी कर रहे थे, जिसे लेकर वे काफी उत्साहित थे। इन हॉरर फिल्मों के पीछे असली सोच श्याम रामसे की होती थी। उनके परिवार में उनकी दो बेटियां साशा और नम्रता हैं, जिनमें से साशा रामसे हॉरर फिल्मों की अपने पिता की विरासत को संभालने की तैयारी कर रही हैं। वे अब इन फिल्मों को वेब सीरीज में बदलेंगी।

रामसे बंधुओं के यहां तक पहुंचने की कहानी अविभाजित भारत के कराची में रेडियो की एक छोटी सी दुकान से शुरू होती है। दुकान के मालिक फतेहचंद यू रामसिंघानी मुंबई आ गए और फिल्म निर्माण में हाथ आजमाया। रामसिंघानी ने ही अपने नाम के आगे ‘रामसे’ लगाया। फिर वह एक-एक करके अपने सातों बेटों को फिल्म निर्माण में ले आए।

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