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QS World Rankings 2021: जेएनयू सहित इन 12 शिक्षण संस्थानों ने दुनिया में लहराया परचम

नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (Ramesh Pokhriyal Nishank) ने गुरुवार को 12 भारतीय शिक्षण संस्थानों को वर्ष 2021 (QS World Rankings 2021) के लिए QS सब्जेक्ट रैंकिंग में दुनिया की शीर्ष 100 में स्थान हासिल करने के लिए बधाई दी।

‘वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग’ जारी होने के बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने भारतीय उच्च शिक्षा में सुधार पर  निरंतर ध्यान दिया है।  जिससे विश्व स्तर पर भारतीय संस्थानों के प्रतिनिधित्व में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, जिसका साक्षात उदाहरण QS सब्जेक्ट रैंकिंग (QS World Rankings 2021) में देखा जा सकता है।

इन 12 शिक्षण संस्थानों ने लहराया परचम

इस रैंकिंग और रेटिंग ने वैश्विक उत्कृष्टता की ओर प्रेरित करने वाले भारतीय संस्थानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है। इन 12 भारतीय संस्थानों ने विश्व के शीर्ष 100 में स्थान हासिल किया है- जिसमें आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मद्रास, आईआईटी खड़गपुर, आईआईएससी बैंगलोर, आईआईटी गुवाहाटी, आईआईएम बैंगलोर, आईआईएम अहमदाबाद, जेएनयू, अन्ना विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और ओपी जिंदल विश्वविद्यालय शामिल है।

इन शीर्ष 100 रैंक वाले संस्थानों में से, IIT मद्रास को पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के लिए दुनिया में 30 वां स्थान दिया गया है, IIT बॉम्बे को 41 वें स्थान पर और IIT खड़गपुर को खनिज और खनन इंजीनियरिंग के लिए दुनिया में 44 वां स्थान दिया गया है, और दिल्ली विश्वविद्यालय को विकास अध्ययन के लिए दुनिया में 50 वें स्थान पर शामिल किया गया है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महाशक्ति बनेगा भारत

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली राष्ट्र की प्रतिस्पर्धा को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज भारत उच्च शिक्षा में नामांकन के मामले में पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति के साथ दुनिया भर में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में एक अग्रणी देश है, जिसके पास अब तक 37.4 मिलियन नामांकन है।

उच्च शिक्षा में लिंग अंतर को लेकर सरकार की सरहाना करते हुए उन्होंने कहा कि अब उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी 48.6 फीसदी तक पहुंच गई है। पोखरियाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारतीय शिक्षा प्रणाली में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के माध्यम से नए सुधार लाए गए हैं। एनईपी पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि यह 21 वीं सदी में भारतीय उच्च शिक्षा में महाशक्ति बनने पर जोर देता है।

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इसमें समग्र और बहु-विषयक शिक्षा के लिए एक दूरंदेशी दृष्टि भी है, जो धाराओं के कठोर अलगाव को समाप्त करती है। यह शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण की दिशा में मार्ग प्रशस्त करती है और विश्व के शीर्ष-विश्वविद्यालयों को भारत में परिसरों को खोलने के लिए प्रोत्साहित करती है।

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