इस्लामिक हेरिटेज में मोदी बोले, ‘मुस्लिमों के एक हाथ में कुरान और दूसरे में हो कंप्यूटर हो’

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज विज्ञान भवन में आयोजित इस्लामिक हेरिटेज के कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उनके साथ जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय भी मौजूद रहे। पीएम मोदी ने कहा कि आज सबसे ज्यादा जरूरत इस बात की है कि हमारे युवा एक तरफ मानवीय इस्लाम से जुड़े हों और दूसरी ओर आधुनिक विज्ञान और तरक्की के साधनों का इस्तेमाल भी कर सकें। मोदी ने आगे कहा कि हम चाहते हैं कि मुसलमानों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कम्प्यूटर हो। बता दें कार्यक्रम में शिरकत करने से पहले जॉर्डन के किंग राष्ट्रपति भवन पहुंचे। राष्ट्रपति भवन में रामनाथ कोविंद ने और पीएम मोदी ने उनका भव्य स्वागत किया।

जॉर्डन नरेश की इस्लाम की पहचान बनाने में अहम भूमिका है

इस्लामिक हेरिटेज के कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि जॉर्डन नरेश की इस्लाम की पहचान बनाने में अहम भूमिका है। जॉर्डन का नाम संतों और पैंगबरों की आवाज बनकर दुनिया भर में गूंजा है। वहीं, जॉर्डन के किंग ने अपने संबोधन में कहा कि वह रोजाना अपने परिवार को इस्लाम की विरासत के बारे में बताते हैं। मोदी ने आगे कहा कि, आपका वतन और हमारा दोस्त देश जॉर्डन इतिहास की किताबों और धर्म के ग्रंथों में एक अमिट नाम है।

पीएम ने कहा कि विरासत की विविधता पर हमें गर्व है

पीएम ने आगे कहा कि विरासत की विविधता पर हमें गर्व है, विविधता की विरासत पर हमें गर्व है। जहां पर मंदिर में दिया जलता हो, मस्जिद में सजदा पर हमें गर्व है। गुरुद्वारे में सबद, चर्चा में प्रार्थना पर हमें गर्व है। उन्होंने कहा कि परंपरा की विविधता हमें संबल देती है। मोदी बोले, जॉर्डन एक ऐसी पवित्र भूमि पर आबाद है, जहां से ख़ुदा का पैग़ाम पैगम्बरों और संतों की आवाज बनकर दुनिया भर में गूंजा। भारत में हमारी यह कोशिश है कि सबकी तरक्की के लिए सबको साथ लेकर चलें।

जॉर्डन के किंग ने क्या कहा

इस दौरान जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने कहा कि कई लोगों की तरफ से दुनिया में अविश्वास बढ़ाया जा रहा है। आज जो धर्म के नाम पर हम देख रहे हैं उसमें लोगों का बांटा जा रहा है। ऐसी घृणास्पद विचारधारा आपस में लड़ाई पैदा करने के लिए ‘गॉड’ के नाम पर गलत बयानी करता है। बता दें किंग अब्दुल्लाह द्वितीय बिन अल हुसैन पैगंबर मुहम्मद के 41वीं पीढ़ी के वंशज हैं और उन्हें कट्टरवाद और आतंकवाद से लड़ने के लिए वैश्विक पहल के लिए जाना जाता है।

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