Raja Rammohan Roy Jayanti 2021: जानें क्यों छोड़े थे ईस्ट इंडिया कंपनी की नौकरी, Alexander Duff से मिली मदद

राजा राममोहन राय की आज 249 जयंती है, उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) की नौकरी छोड़कर अपने आपको राष्ट्र सेवा में झोंक दिया। भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के अलावा वे दोहरी लड़ाई लड़ रहे थे

नई दिल्ली: ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) की नौकरी छोड़कर अपने आपको राष्ट्र सेवा में झोंकने वाले ‘राजा राममोहन राय’ (Raja Ram Mohan Roy) की आज 249 जयंती है। उन्होंने बाल-विवाह, सती प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड, पर्दा प्रथा आदि का उन्होंने भरपूर विरोध किया।

पत्रकारिता को चमक

राजा राममोहन राय ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और पत्रकारिता (Journalism) के कुशल संयोग से दोनों क्षेत्रों को गति प्रदान की है। उनके आंदोलनों ने जहां पत्रकारिता को चमक दी, वहीं उनकी पत्रकारिता ने आंदोलनों को सही दिशा दिखाने का कार्य किया है। राजा राममोहन राय की दूर‍दर्शिता और वैचारिकता के सैकड़ों उदाहरण इतिहास में दर्ज हैं। वे रू‍ढ़िवाद और कुरीतियों के विरोधी थे लेकिन संस्कार, परंपरा और राष्ट्र गौरव उनके दिल के करीब थे। वे स्वतंत्रता चाहते थे लेकिन चाहते थे कि इस देश के नागरिक उसकी कीमत पहचानें।

राजा राममोहन राय का जन्म बंगाल में 1772 में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। 15 वर्ष की आयु तक उन्हें बंगाली, संस्कृत, अरबी तथा फ़ारसी का ज्ञान हो गया था। किशोरावस्था में उन्होंने काफी भ्रमण किया। राजा राममोहन राय ने 1809-1814 तक ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम किया है। उन्होने ब्रह्म समाज की स्थापना की  है। उन्होंने इंग्लैण्ड और फ्रांस में भ्रमण भी किया है।

ईस्ट इंडिया कंपनी में नौकरी

राममोहन राय ने ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) की नौकरी छोड़कर अपने आपको राष्ट्र सेवा में झोंक दिया। भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के अलावा वे दोहरी लड़ाई लड़ रहे थे। दूसरी लड़ाई उनकी अपने ही देश के नागरिकों से थी। जो अंधविश्वास और कुरीतियों में जकड़े थे। राजा राममोहन राय ने उन्हें झकझोरने का काम किया।

 

बाल-विवाह, सती प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड, पर्दा प्रथा आदि का उन्होंने भरपूर विरोध किया। धर्म प्रचार के क्षेत्र में अलेक्जेंडर डफ्फ ने उनकी काफी सहायता की। देवेंद्र नाथ टैगोर उनके सबसे प्रमुख अनुयायी थे। आधुनिक भारत के निर्माता, सबसे बड़ी सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संस्थापक, ब्रह्म समाज, राजा राम मोहन राय सती प्रणाली जैसी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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