प्रमोशन न मिलने पर IAS अफसर ने इस्‍लाम कबूला

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जयपुर। राजस्‍थान के वरिष्‍ठ IAS अफसर उमराव सालोदिया ने प्रमोशन में नजरअंदाज करने पर सरकार को अपना इस्‍तीफा भेज दिया है। वह इस घटनाक्रम से इतने दुखी हुए कि उन्‍होंने इस्‍लाम कबूल कर लिया।

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उमराव ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर इसकी जानकारी पत्रकारों से साझा की। उन्‍होंने कहा, ‘मैं दलित हूं, इसलिए मेरी अनदेखी की जा रही है।’ उमराव सालोदिया के मुताबिक उनसे जूनियर अफसर को मुख्‍य सचिव पद पर प्रमोशन दे दिया गया, जबकि इसके हकदार वह खुद थे।

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वहीं, सरकार ने सारे आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। राजस्थान सरकार के प्रवक्ता व संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा, ‘रिटायरमेंट से महज छह माह पहले उमराव सालोदिया ने सरकार पर अनुसूचित जाति और जन जाति वर्ग के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है। भारतीय सेवा आचरण नियम 1968 नियम सात के तहत पद पर रहते हुए सार्वजनिक तौर पर या संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से सरकार की नीति और रीति की आलोचना नहीं कर सकते हैं।’ राठौड़ ने कहा, ‘सालोदिया के खिलाफ राजस्व मंडल में रहते हुए सरकारी टिप्पणी लिखने का एक मुकदमा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज है।’

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उधर सालोदिया का कहना है, ‘मैंने आज मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अपनी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन भेज दिया है। केन्द्रीय कर्मचारियों के सेवानियम के तहत मैंने तीन महीने के नोटिस के तहत यह आवेदन भेज कर 31 मार्च 2016 को सेवानिवृत्ति का अनुरोध किया है। भारत सरकार को भी आज मैं यह पत्र भेज रहा हूं।’ उमराव सालोदिया 1978 बैच के IAS अधिकारी हैं और राजस्थान पथ परिवहन निगम के अध्यक्ष हैं।

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संगीत और गायन में महारथ हासिल वरिष्ठ अधिकारी उमराव सालोदिया ने कहा कि भारतीय संविधान में प्राप्त मूलभूत अधिकारों के तहत उन्होंने आज से इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है।

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उन्‍होंने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। कहा कि मेरे खिलाफ कई गलत शिकायतें करने वाले एक रिटायर डीएम के खिलाफ मैंने जयपुर के एक थाने में अनुसूचित जाति/जन जाति की धाराओं के तहत 24 मई 2014 को मुकदमा दर्ज करवाया था, लेकिन पुलिस ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि जब मेरे मामले में यह स्थिति है तो आम आदमी, दलित की क्या स्थिति होगी।

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