गिरफ्तारी से तो बच गए राजेंद्र कुमार, लेकिन 7 घंटे तक हुई पूछताछ

0

arvind-rajendra-compressed-580x395नई दिल्ली। दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार गिरफ्तारी से तो बच गए, लेकिन सीबीआई के हेडक्‍वार्टर में उनसे 7 घंटे तक पूछताछ जरूर की गई। सीबीआई ने पूछताछ के बाद रात 12 बजे उन्‍हें घर जाने की अनुमति दी। वहीं बुधवार को भी उनसे पूछताछ जारी रहेगी।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, छापेमारी के दौरान जब्त दस्तावेजों के बारे में उनसे पूछताछ की गई। एजेंसी ने मंगलवार को राजेंद्र के घर, दफ्तर सहित 14 जगहों पर छापेमारी की थी। बताया जाता है कि सीबीआई ने राजेंद्र कुमार के घर से कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं। इनमें राजेंद्र कुमार की अचल संपत्ति से जुड़े कागजात भी हैं।

मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने एजेंसी को बताया कि उन्होंने वैध तरीकों से संपत्ति की खरीद-फरोख्त की है। राजेंद्र कुमार ने सीबीआई को अपने घर से बरामद कैश और विदेशी मुद्रा के स्रोत के बारे में भी जानकारी दी।

कौन हैं राजेन्द्र कुमार

rajendra_650_121515115814दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। केजरीवाल ने राजेन्द्र कुमार को अपने 49 दिन के पहले कार्यकाल के दौरान भी प्रधान सचिव बनाया था। राजेंद्र कुमार अरविंद केजरीवाल के कितने करीब हैं इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि इसी साल दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने मुख्य सचिव अनिंदो मजुमदार के ऑफिस में ताला डालकर उसे सील कर दिया था और दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर की अनदेखी करते हुए राजेन्द्र कुमार को अपना प्रधान सचिव बनाया था।

क्‍या है आरोप

राजेंद्र कुमार का नाम सीएनजी फिटनेस घोटाले से जुड़ा है। दिल्ली में भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो (एसीबी) कमर्शियल वाहनों के लिए फिटनेस टेस्ट के दौरान कथित अनियमितता के मामले में आईएएस राजेंद्र कुमार से पहले ही पूछताछ कर चुकी है। दिलचस्प है कि जिस अधिकारी एमके मीणा को निगरानी विभाग का प्रमुख बनने से केजरीवाल ने रोकने की भरपूर कोशिश की थी, उसी अधिकारी ने राजेंद्र कुमार से पूछताछ की थी। बताया जा रहा है कि उनसे इस बारे में पूछताछ हुई है कि उन्होंने सीएनजी फिटनेस घोटाला मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की थी। कहा जा रहा है कि परिवहन सचिव रहते राजेंद्र कुमार ने कार्रवाई नहीं की थी।

क्या है सीएनजी फिटनेस घोटाला

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में सीएनजी किट लगाने के लिए दो कंपनियों को ठेका दिया गया था। आरोप है कि इसमें 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान दिल्ली सरकार को उठाना पड़ा था।

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के समय सीएनजी किट लगाने ठेका एक कंपनी को दिया गया था। इसमें कई खामियां मिलीं थी। बिना टेंडर का ठेका दिया गया था। इसमें खर्च सरकार कर रही थी और आमदनी कंपनी ले रही थी। फर्जी फिटनेस टेस्ट करके पैसा लिया जा रहा था। जांच में पाया गया कि 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान दिल्ली सरकार को उठाना पड़ा था।

loading...
शेयर करें