कावेरी विवाद मामले में रजनीकांत ने मारी एंट्री, तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने किया विरोध प्रदर्शन

चेन्नई| कावेरी जल विवाद मामले में तमिलनाडु हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अभी तक कावेरी प्रबंधन बोर्ड (सीएमबी) का गठन नहीं किये जाने से नाराज तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक नई मुहिम छेड़ दी है। दरअसल, तमिल के सुपरस्टार से राजनेता की भूमिका में आए कमल हासन व रजनीकांत की अगुवाई में तमिल फिल्म के कई दिग्गजों ने मौन विरोध प्रदर्शन किया है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान तूतीकोरिन में वेदांता समूह के तांबा गलाने के संयंत्र के परिचालन के खिलाफ भी आवाज उठाई गई।

इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन दक्षिण भारतीय फिल्म कलाकार संघ द्वारा किया गया था। इस संघ को नदीगर संगम के नाम से जाना जाता है। इसमें तमिल फिल्म निर्माता परिषद व दक्षिण भारत फिल्म कर्मचारी संघ के सदस्यों ने भाग लिया। विरोध प्रदर्शन में प्रमुख अभिनेताओं, फिल्म व संगीत निर्देशकों व दूसरे तकनीशियनों ने भाग लिया। इसमें संगीत निर्देशकों में इलैयाराजा, शंकर-गणेश, अभिनेताओं में सूर्या, विजय, विशाल, प्रशांत व अन्य शामिल थे।

इससे पहले अपने आवास के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में रजनीकांत ने कहा कि यदि सीएमबी व कावेरी जल नियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की स्थापना नहीं की गई तो केंद्र सरकार को तमिलनाडु के लोगों की नाराजगी का सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के खिलाड़ियों को यहां इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मैच खेलते समय काले बैज पहनने चाहिए, ताकि यह मुद्दा पूरे देश को पता चल सके।

वेदांता समूह के तांबा संयंत्र पर रजनीकांत ने कहा कि यदि करोड़ों रुपये का राजस्व भी आता हो तो भी पांच तत्वों -हवा, जल, पृथ्वी, आग व आकाश- को प्रदूषित नहीं होने देना चाहिए।

कावेरी जल विवाद मामले में आमने-सामने खड़े कर्नाटक और तमिलनाडु सीएमबी के गठन को लेकर एक दूसरे की मांग का विरोध कर रहे हैं। एक तरफ जहां तमिलनाडु इसके गठन की मांग कर रही है। वहीं कर्नाटक सीएमबी के गठन का विरोध कर रही है। वह इसके लिए फैसले को लागू करने की वैकल्पिक प्रक्रिया की मांग की है।

आपको बता दें कि सीएमबी के गठन को लेकर अभी बीते दिनों तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के खिलाफ अवमानना नोटिस दायर की थी। तमिनाडु ने इस अवमानना याचिका में कहा है कि केंद्र एक योजना बनाकर इस फैसले को प्रभावी करने के लिए बाध्य था ताकि छह हफ्ते के भीतर कावेरी प्रबंधन बोर्ड और कावेरी जल नियमन समिति के अधिकारी तय किए जा सकें।

भारतीय संविधान के अनुसार कावेरी एक अंतर्राज्यीय नदी है। कर्नाटक और तमिलनाडु इस कावेरी घाटी में पड़ने वाले प्रमुख राज्य हैं। इसलिए दोनों ही इस पर अपना हक जता रहे थे। लेकिन इस घाटी का एक हिस्सा केरल में भी पड़ता है और समुद्र में मिलने से पहले ये नदी कराइकाल से होकर गुजरती है, जो पुडुचेरी का हिस्सा है। इसलिए इस नदी के जल के बंटवारे को लेकर इन चारों राज्यों में विवाद का एक लंबा इतिहास रहा है। चारों राज्य ही इस नदी पर अपना अधिकार जताते आ रहे हैं।

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