राज्यसभा चुनाव : विरोधी होने बाद भी मायावती का साथ देंगे राजा भैया

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लखनऊ। राज्यसभा चुनाव को जीतने के लिए सभी राजनैतिक पार्टियां जोड़-तोड़ में जुटी हैं। सपा बसपा प्रत्याशी को जीताने के लिए जी-तोड़ कोशिश में लगी है। आये दिन बैठकों और डिनर पार्टियों का आयोजन किया जा रहा है। सपा और बसपा को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। इसके लिए सपा लगातार अपने विधायकों के साथ निर्दलीय उम्मीदवारों से संपर्क बनाये हुए है।

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बुधवार रात अखिलेश यादव ने राज्यसभा चुनाव पर चर्चा के लिए डिनर पार्टी का आयोजन किया। अंदेशा जताया जा रहा था कि इस पार्टी में निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया शामिल होंगे या नहीं। लेकिन राजा भैया ने इस भोज में शामिल हो कर सबको चौंका दिया।

दरअसल 2002 में मायावती सरकार में राजा भैया के खिलाफ कई आपराधिक केस दर्ज किये गए। राजा भैया पर पोटा की धाराएं लगाई गईं। रघुराज और उनके पिता उदय प्रताप सिंह को जेल में डाल दिया गया। राजा भैया की करोडो की  सपत्ति जब्त कर ली गई। इन सबको देखते हुए ऐसा लग रहा था की राजा भैया मायावती का साथ देंगे या नहीं।

लेकिन कहते हैं राजनीति में परमानेंट कोई दुश्मन नहीं होता है। ठीक ऐसा ही हुआ है। राजा भैया ने अखिलेश यादव का साथ देने की बात कही। यानि वो बसपा प्रत्याशी को अपना फुल सपोर्ट देने को तैयार हैं।

आपको बता दें कि  यूपी में राज्यसभा के लिए 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। मौजूद हालात में बीजेपी के 8 प्रत्याशी राज्यसभा जा सकते हैं। वहीँ सपा भी अपना एक प्रत्याशी राज्यसभा भेज रही है। अब बचे एक सीट के लिए बीजेपी के अनिल अग्रवाल और बसपा के भीमराव अम्बेडकर के बीच मुकाबला है।

विधानसभा में सपा की 47 सीटें हैं। वहीँ उसने जया बच्चन को अपना उम्मीदवार बनाया है। अपने प्रत्याशी को वोट देने के बाद सपा के पास 10 वोट और बचते है जिसे वो बसपा प्रत्याशी को देगी। सपा विधायक और नरेश अग्रवाल के ​बेटे नितिन अग्रवाल ने बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया है। अब इस वोट की जगह राष्ट्रीय लोकदल अपना एक मत बसपा को देगा। रजा भैया के समर्थन के बाद बसपा के 19 और कांग्रेस के 7 विधायक भीमराव अंबेडकर को राज्यसभा सीट दिला सकते हैं।

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