नई पहचान के साथ राखीगढ़ी गांव, खुदाई में मिला सात फुट का कंकाल

हरियाणा:हरियाणा के हिसार का राखीगढ़ी गांव जल्द ही दुनिया के नक्शे में अपनी नई पहचान बनाएगा। इस गांव के नीचे चार हजार साल पुरानी सभ्यता होने के संकेत मिले है। जिसे हड़प्पा की सभ्यता से भी पुराना माना जा रहा है। डक्कन कॉलेज पुणे के योगेश यादव कहते है कि देश में करीब चार हजार के आसपास साइट हैं जहां सभ्यता की निशानी मिलती है लेकिन ये हड़प्पा से पुरानी है।

केंद्रीय बजट में इस दुर्लभ खोज को आगे बढ़ाने और इस सांस्कृतिक धरोहर को संजोने के काम ने रफ्तार पकड़ी है। गांव के पास निर्माणाधीन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस संग्रहालय दिसंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा। इसी के साथ केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने रविवार को राखीगढ़ी का दौरा कर जमीनी हकीकत जानी और अड़चनों को दूर किया। केंद्रीय मंत्री का कहना है कि जल्द ही राखीगढ़ी दुनिया में अनूठी पहचान पाएगा।
गांव के प्रभावित लोगों को नए मकान के साथ ही रोजगार भी मुहैया कराये जायेंगे। इस धरोहर को देखने के लिए  देश दुनिया से लोग आएंगे। स्थानीय युवाओं को गाइड और अन्य रोजगार से जोड़ने की भी योजना है। एएसआई से जुड़े अधिकारी के मुताबिक यहां अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रोहरी हिल्स से जुड़े पत्थर, बादकसा के लाजवर्त भी मिले हैं।
इसके साथ ही खुदाई में कुछ कंकाल भी मिले हैं। जिसमें दो कंकाल करीब सात फुट के हैं जिन्हें दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा गया है। उस दौर में हमारा मिस्र, इराक के सुमेर मेसोपोटामिया, आदि से गुजरात के रास्ते व्यापार था। आज भी गांव वालों के रहन-सहन में वो तमाम वस्तुएं पीढ़ी दर पीढ़ी देखने को मिल जाती हैं जो खुदाई में मिली हैं।
1963 में पहली बार निजी स्तर पर स्थानीय आचार्य भगवान देव ने जमींदोज विरासत के चिह्नों का पता लगाया। उसी दौरान झज्जर स्थित गुरुकुल के निजी संग्रहालय में यहां से निकले सिक्के और वस्तुएं आदि रखी गई है। भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसके महत्व को 1997 में समझा और 2000 के बीच तीन बार इस जगह खुदाई भी की।

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