राम प्रसाद बिस्मिल को यहां दी गई थी फांसी, राष्ट्रीय आजादी का जाने इतिहास

क्रान्तिकारी आन्दोलन के सम्बंध में उत्तर प्रदेश में जो पहला बलिदान मातृ-वेदी पर हुआ वह काकोरी षडयंत्र के नाम से राष्ट्रीय आजादी के इतिहास में प्रसिद्ध हुआ जिसके नायक थे पंडित राम प्रसाद बिस्मिल।

गोरखपुर: देश को गुलामी की जंजीरों से रिहायी दिलाने वाले अमर क्रान्तिकारियों में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का नाम सबसे उपर लिखा जायेगा। गोरखपुर जिला जेल पंडित बिस्मिल के जीवन के आखिरी दिनों का साक्षी है जहां अन्त में इस क्रान्तिकारी को फांसी की सजा दी गयी।

वर्ष 1857 के आजादी आन्दोलन की घटनाओं के बाद क्रान्तिकारी आन्दोलन के सम्बंध में उत्तर प्रदेश में जो पहला बलिदान मातृ-वेदी पर हुआ वह काकोरी षडयंत्र के नाम से राष्ट्रीय आजादी के इतिहास में प्रसिद्ध हुआ जिसके नायक थे पंडित राम प्रसाद बिस्मिल।

पंडित बिस्मिल का जन्म 11 जून 1897 में शाहजहांपुर में हुआ था। इनके पितामह ग्वालियर राज्य के मूल निवासी थे और दादा गृहकलह से उब कर शाहजहांपुर में आकर बस गये थे।
जिस बिस्मिल जी को परतंत्र भारत की जालिम ब्रिटिश सरकार की अदालत ने उत्तर भारत से सशस्त्र क्रांतिकारी दल का मुख्य कार्यकर्ता और नेता घोषित कर प्राण दंड प्रदान किया वह बिस्मिल क्रान्तिकारी आन्दोलन में कैसे आये यह कहानी भी मार्मिक हैं।

धार्मिक और राजनीतिक उपदेश देने लगे

वर्ष 1915 तक बिस्मिल आर्य समाज के माध्यम से राजनीति में रूचि लेने लगे थे। उन्ही दिनों में सोमदेव नामक एक महात्मा से इनकी मुलाकात हो गयीं जो इन्हें धार्मिक और राजनीतिक उपदेश देने लगे। स्वामी बिस्मिल से अक्सर कहा करते थे कि एन्ट्रेस पास करके यूरोप यात्रा करना इटली जाकर महात्मा मैजिन की जन्मभूमि का दर्शन अवश्य करना। सन 1916 में लाहौर षडयंत्र का मुकदमा चला और भाई परमानंद को फांसी की सजा मिली। इस खबर को पढ़कर बिस्मिल के बदन में आग लग गयी।

अंग्रेज बडे अत्याचारी हैं इनके राज्य में न्याय नहीं

उन्होंने विचारा कि अंग्रेज बडे अत्याचारी हैं इनके राज्य में न्याय नहीं, जो इतने बडे महानुभाव को फांसी की सजा दे दी। बिस्मिल ने प्रतीज्ञा किया कि इसका बदला जरूर लूंगा और जीवन भर अंग्रेजी राज्य को विध्वंस करने का प्रयत्न करता रहुंगा। बिस्मिल मैट्रिक में पढ़ रहे थे उसी समय पंडित गेंदालाल दीक्षित के सम्पर्क में आये और वे मैनपुरी षडयंत्र में दीक्षित की काफी सहायता किया।

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ब्रिटिश सरकार के कारकून के घर को लूटा

इसी दौरान दीक्षित जब पकडे गये तो बिस्मिल ने उन्हें छुडाने के लिए 15 विद्यार्थियों को साथ लेकर एक ब्रिटिश सरकार के कारकून के घर को लूटा। बिस्मिल जिला जेल की कोठरी नं. आठ में रहते हुए लिखते हैं कि मुझे इस कोठरी में बडा आनन्द आ रहा है। वे वहां से लिखे अपने मां को एक पत्र में कहा था कि तुम्हे मेरी मौत की दर्दनाक खबर सुनायी जायेगी। मां मुझे यकीन है कि तुम सहन कर लोगी क्योंकि तुम्हारा बेटा माताओं की माता ..भारत माता..की सेवा में आखिर जिन्दगी को कुर्बान कर रहा है। उसने तुमहारे परिवार पर कोई आंच नहीं आने दी बल्कि उसका रूतबा बुलन्द किया।

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भारत माता की जय बोलते हुए फांसी पर झूले थे

19 दिसम्बर 1927 को प्रातः साढ़े छह बजे बन्देमातरम और भारत माता की जय बोलते हुए पं0 राम प्रसाद बिसिमल फांसी पर झूल गये थे। फांसी पर झूलते समय ..उॅ.. का ऐसा उच्चारण उनहोंने किया जो काफी देर तक आकाश में गूंजता रहा। उसी दिन ठाकुर रोशन सिंह इलाहाबाद, असफाक उल्ला वाराणसी ,फैजाबाद और राजेन्द्र नाथ लाहिडी को गोंडा में फांसी दी गयी थी।

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