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Ramadan 2021 : क्या है सहरी, इफ्तार और तरावीह? रमज़ान में मुसलमान ऐसे करते हैं इबादत

Ramadan इस्लाम धर्म के सबसे पाक महीनों में से एक है। मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे साल इस महीने का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

नई दिल्ली: Ramadan इस्लाम धर्म के सबसे पाक महीनों में से एक है। मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे साल इस महीने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। ऐसा माना जाता है कि अल्लाह Ramadan के महीने में की गई इबादत आम दिनों में की गई इबादतों से ज़्यादा खुश होते हैं और सभी को मन चाहा सवाब देते हैं।

Ramadan में की गई इबादतों का सवाब आम दिनों के मुकाबले 70 गुनाह ज्यादा होता है। मुस्लिम समुदाय के लोग रमज़ान के पूरे महीने यानी 29 से 30 दिन तक रोजे रखते हैं, नमाज़ पढ़ते हैं और कुरान की तिलावत करते हैं। रमजान का पाक महीना इस बार 14 अप्रैल यानी कि आज से शुरू हुआ है। आज से ही रोजे़ और नमाज़ का सिलसिला शुरू हो गया है।

रमज़ान के महीने का महत्व

ऐसी मान्यताएं हैं कि Ramadan के महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमत बरसाता है और उन्हें बेशुमार खुशियों से नवाज़ता है। उनके लिए दोज़ख के दरवाजे बंद कर जन्नत के दरवाजे खोल देता है। माना जाता है कि Ramadan में अल्लाह अपने बंदों की हर जायज़ दुआ को कुबूल करता है। यही वजह है कि रमज़ान के महीने में लोग इबादत करने के साथ-साथ अल्लाह से अपने गुनाहों की तहे दिल से माफ़ी भी मांगते हैं।

पाक महीने में कुरान पढ़ने की अहमियत

इस्लाम में रमज़ान के पाक महीने में रोज़ा रखने और नमाज़ के साथ कुरान भी पढ़ी जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रमज़ान के महीने में ही 21वें रोजे को पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब पर अल्लाह ने ‘कुरान शरीफ’ नाजिल किया था।

क्या होती हैं तरावीह?

अक्सर हमने सुना है कि मुस्लिम समुदाय के लोग रमज़ान के महीने में हर दिन 5 वक्त की नमाज़ अदा करते हैं। लेकिन इसके अलावा रात के वक्त एक विशेष तरह की नमाज़ भी पढ़ी जाती है। इस नमाज़ को तरावीह कहते हैं।

सहरी और इफ्तार

Ramadan में सहरी सुबह सूरज निकलने से पहले खाए गए खाने को कहते हैं।  शाम में सूरज ढलने पर जब रोजा खोलते हैं तो उसे इफ्तार कहते हैं। कहा जाता है कि इफ्तार के समय रोजेदार दिल से जो दुआ मागंते हैं, अल्लाह उनकी तमाम जायज दुआएं कुबूल करता है।

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आंख, ज़ुबान और कान का भी होता है रोज़ा

रोजे रखने का मतलब सिर्फ खाने और पीने की चीजों से दूरी बनाना नहीं होता है। बल्कि रोजा आंख, जुबान और कान का भी किया जाता है। यानी रोजा रखने के बाद रोजेदार ना गलत बात कर सकता है और ना झूठ बोल सकता है और ना ही किसी की बुराई कर सकता है। इसी तरह गलत चीजों को देखने और सुनने से भी रोजा टूट जाता है।

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