रामदेव का ‘किंभो’ मोबाइल ऐप अपडेट होकर बना ‘बोलो ऐप’, पतंजलि ने बताया नकली

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नई दिल्ली: योग गुरु बाबा रामदेव के स्वामित्व वाली पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने हाल ही में स्वदेशी मेसेंजर ऐप किंभो लॉन्च किया था। इसे व्हाट्सऐप की टक्कर का बताया गया था। हालांकि ऐप में कुछ खामियों के चलते इसे प्ले स्टोर से हटा लिया गया था। अब पतंजलि आयुर्वेद ने किंभो ऐप को नये वर्जन में अपडेट कर बोलो मैसेंजर के नाम से रख दिया है। हालांकि पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने बताया कि किंभो ऐप का इससे कोई लेना देना नहीं है, बल्कि किंभो एप का लेटेस्ट वर्जन पर काम चल रहा था।

किंभो के नाम पर नकली ऐप आ रहे- पतंजली

पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने ट्वीट कर कहा है कि किंभो ऐप अभी अडवांस डिवेलपमेंट प्रोसेस में है और जल्द ही इसे स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण लॉन्च करेंगे। इसके बाद इस ऐप को प्ले स्टोर और ऐपल स्टोर पर डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा। बाद में एक ऑफिशल मेसेज में पतंजलि ने कहा है कि अन्य कंपनियां पतंजलि के नाम पर नकली ऐप उपलब्ध करा रही हैं इसलिए ऐसे फर्जी ऐप्स से सावधान रहें।

‘बोलो ऐप’ की डेवलपर ने दी ये जानकारी

वहीं बोलो मैसेंजर ऐप की डेवलपर अदिति कमल ने ईमेल के जरिए बताया कि भारतीयों के लिए व्हाट्सएप के विकल्प के रूप में ‘बोले ऐप’ को तैयार किया गया है. इसे अब एंड्रॉयड यूजर के लिए उपलब्ध करा दिया गया है. जल्द ही iOS यूजर्स के लिए भी इसे जल्द ही मुहैया कराया जाएगा। उन्होंने आगे बताया, ऐसे यूजर्स, जिन्होंने अभी इसे इंस्टॉल नहीं किया या अभी तक किंभो ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं, लिंक जरिए बोले ऐप को अपडेट कर सकते हैं। ‘बोलो एप’ अपडेट करने के लिए इसे एसएमएस के जरिए अपडेट करना होगा। पूर्व में किंभो ऐप रहा बोले ऐप को लंबे समय बाद नए वर्जन के साथ बाजार में उतारा गया है।

व्हाट्सऐप की टक्कर का बताया गया था किम्भो ऐप

दरअसल, योग गुरु बाबा रामदेव की स्वदेश कंपनी ने व्हाट्सऐप को टक्कर देने के लिए मई के आखिर में बाजार में किंभो ऐप उतारा था। लेकिन यह एक फ्लॉप हो गया। वित्तवर्ष 2017 में 10,561 करोड़ रुपए का टर्नओवर करने वाली कंपनी पतंजलि ने पहले तो लोगों से इस एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करने को कहा, फिर इसके तुरंत खत्म होने के लिए इंटरनेट पर अत्यधिक ट्रैफिक को दोष दिया, उसके बाद में कहा कि यह सिर्फ एक दिवसीय परीक्षण था और अब पतंजलि ने इसे दोबारा लांच करने के लिए दो और महीनों का वक्त मांगा था।

एक दिन बाद ही प्ले स्टोर से हट गया था किंभो

योजना के तहत पतंजलि द्वारा पेश किये मोबाइल ऐप किंभो को 31 मई को गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद कराया गया था। लेकिन अगले दिन ही सुरक्षा और प्रदर्शन में खामियों के चलते यह प्ले स्टोर से गायब हो गया। इससे देश की प्रौद्योगिकी उद्योग को झटका लगा था।

किंभो नाम क्यों? क्या थे ऐप के फीचर्स

पतंजलि ने अपने मोबाइल ऐप का नाम सांस्कृति शब्द से लेते हुए किंभो ऐप रखा, जिसका अर्थ है- आप कैसे हैं? या क्या चल रहा है? इसमें मैसेजिंग एप, टीवी और कई अन्य विशेषताओं का दावा किया गया था। अब प्रश्न उठता है कि इस एप को लांच करने की जल्दबाजी क्या थी? जबकि इसे व्हाट्सएप के लिए चुनौती के तौर पर पेश किया गया था। व्हाट्सएप के वैश्विक उपभोक्ता लगभग 1.5 अरब और भारत में 20 करोड़ हैं।

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