IPL
IPL

रंगभरी एकादशी 2021: ब्रज में चढ़ा फागुन का रंग, चहु ओर उड़े गुलाल

उत्तर प्रदेश में वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में रंगभरी एकादशी के मौके पर लोगों ने खेली ठाकुर जी के साथ होली

मथुरा: रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) के मौके पर भक्त सुबह से ही बांके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी की पूरा-अराधना करने के बाद होली खेल रहे हैं। देशभर से आए भक्त ब्रज में ठाकुर जी के भक्ती में डूबे हुए है। मंदिर में चोरों ओर उड़ रहें है गुलाल के रंग। जिसके वजह से मंदिर का नजारा बेहद की मंत्रमुग्ध हो गया है।

वृंदावन (Vrindavan) के बांके बिहारी मंदिर में 40 दिनों तक मनाई जाती है होली। जिसकी शुरूआत बसंत पंचमी (Basant Panchami) से ही शुरू हो जाती है। वृंदावन में बसंत पंचमी के दिन से बांके बिहारी मंदिर में रंग उड़ाने की परंपरा शुरू हो जाती है और इसी दिन से ही ब्रज में होली की शुरूआत हो जाती है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

सुबह श्रृंगार आरती और राजभोग की सेवा के बाद ठाकुर जी को रंग लगाकर भक्त होली खेलना शुरू करते है। रंगभरी एकादशी पर भक्त बड़ी संखया में वृंदावन की पंचकोषी परिक्रमा करते हैं। जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिए है ताकि भक्तों को किसी तरह का कोई परेशानी न हो।

बिहारी मंदिर (Bihari Temple) उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के पवित्र शहर वृंदावन में कृष्ण को समर्पित एक मंदिर है। यह भारत के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। बांके बिहारी कृष्ण का ही एक रूप है जो इस मंदिर में प्रदर्शित किया गया है। इसका निर्माण 1864 में स्वामी हरिदास ने करवाया था।

पापों का होता है नाश

वृन्दावन एक ऐसी पावन भूमि है, जहां पर आने मात्र से ही सभी पापों का नाश हो जाता है। ऐसा आखिर कौन सा व्यक्ति होगा जो इस पवित्र भूमि पर आना नहीं चाहेगा तथा बांके बिहारी (Banke Bihari) जी के दर्शन कर अपने को कृतार्थ करना नहीं चाहेगा। यह मन्दिर वृन्दावन धाम के एक सुन्दर इलाके में स्थित है। कहा जाता है कि इस मन्दिर का निर्माण स्वामी हरिदास जी के वंशजो के सामूहिक प्रयास से लगभग सन् 1921 में किया गया था।

यह भी पढ़े13 वर्षीय किशोरी के साथ इतने लोगों ने किया सामूहिक दुष्कर्म, बेहोश मिली लड़की

Related Articles

Back to top button