गोवध के तीन आरोपियों पर से हटाई गई रासुका, लखनऊ बेंच ने बताई बड़ी वजह

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सीतापुर जिले के तीन निवासियों के खिलाफ गौ हत्या के मामले में लगाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति सरोज यादव की पीठ ने पांच अगस्त को इरफान, परवेज व रहमतुल्लाह की तरफ से दाखिल तीन अलग-अलग बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को मंजूर करते हुए यह आदेश पारित किया।

पीठ ने का कहना है कि मान लेते है कि गाय के गोश्‍त का याचियों के घर के अंदर टुकड़े करें जा रहे थे तो उससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की बात तो मान सकते है लेकिन इससे लोक व्यवस्था बिगड़ने की बात नहीं मान सकते। जबकि रासुका लगाने के लिए यह देखना आवश्यक है कि अभियुक्तों के कृत्य से लोक व्यवस्था छिन्न भिन्न हुई हो।

मुखबिर की सूचना पर हुई थी गिरफ्तारी

पुलिस रिकार्ड के मुताबिक मुखबिर की सूचना की पर इन तीनो के घर पर गाय मार कर लाई गयी और वहां पर उसके मांस के टुकड़े करे जा रहे है। इसकी खबर लगते ही सीतापुर की तालगांव पुलिस ने छापेमारी करके इरफान व परवेज मौके से पकड़ लिया गया था और उन्‍होंने रहमतुल्लाह व दो अन्य सहअभियुक्तों के नाम बताये। जिसके बाद रहमतुल्लाह भी पकड़ लिया गया।

पिछले साल लगी थी रासुका

घटना की रिपेार्ट 12 जुलाई 2020 को तालगांव थाने पर गौहत्या व अन्य अपराधों में दर्ज कर ली गयी। इसके बाद में याचीगण पर गैंगस्टर कानून भी लगा दिया गया। तत्पश्चात पुलिस व प्रशासन की रिपोर्ट पर 14 अगस्त 2020 को याचियों के खिलाफ रासुका भी लगा दिया गया था। इसी आदेश को याचीगण ने उच्‍च न्‍यायालय में चुनौती दी थी।

 

Related Articles