जागी बेटियां, हमें भी जगा गईं

dinesh-pathak-150x150दिनेश पाठक

एक बेटी ने दरवाजे से बारात इसलिए लौटा दी क्योंकि दुल्हे राजा पढ़े-लिखे नहीं थे। दूसरी ने शादी से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि दूल्हा रस्में अदा करते समय ही दो बार बेहोश हो गया। एक और बेटी ने बारात दरवाजे से इसलिए लौटा दी क्योंकि दूल्हे राजा शराब के नशे में धुत थे। ये सभी मामले उत्तर प्रदेश के हैं और बीते एक पखवारे में ही घटित हुए। कम से कम मुझे इन बेटियों पर गर्व है और यह जताने के लिए काफी है कि हमारी बेटियां अब जाग चुकी हैं। माता-पिता और अन्य जिम्मेदारों के लिए चेतावनी भी हैं ये घटनाएँ।

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रिश्ता तय करते समय अब ज्यादा सावधानी बरते जाने की जरूरत को भी रेखांकित कर रही हैं ये घटनाएँ। जिससे आगे से दरवाजे तक आई बारात कम से कम ऐसी किसी कमजोरी की वजह से न लौटने पाए। पहले ऐसे मामले कम सुनाई देते थे। जब ऐसी खबरें आने लगीं कि अमुक बेटी ने दहेज़ लोभी ससुरालियों को सबक सिखाया और बारात लौटा दी तो यह भी कौतूहल का विषय हुआ करता था। इस तरह की पहल से निश्चित तौर पर घर वाले तुरंत संकट में पड़ जाते हैं।

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कभी-कभी उन्हें ऐसा भी लगता है कि उनकी बेटी ने इज्जत का ध्यान नहीं रखा। सारी तैयारियां धरी रह गई। समाज में भी कुछ लोगों को बेटियों की ऐसी पहल खराब लग सकती है। पर, एक सच यह भी है ढेरों दुश्वारियों के बीच बेटियों ने साबित किया है कि वे अब जाग गई हैं। उन्हें गाय-भैस की तरह कहीं भी नहीं बाँधा जा सकता।

माता-पिता को रिश्ता तय करते समय वर, उसके परिवारीजनों के बारे में सभी जरूरी जानकारियां हर हाल में जुटानी होंगी । ध्यान देने वाली बात है कि इन तीनों मामलों में घर वालों ने जो जरूरी सावधानियां बरती जानी चाहिए थी, नहीं बरती। नतीजा उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। तत्पल उन्हें यह भी लगा होगा कि उनका तो सब कुछ लुट गया।

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