बैंक घोटाला-नोटबंदी मामलों पर RBI गवर्नर तलब, दागे गये एक के बाद एक कई बड़े सवाल

नई दिल्ली। बढ़ते बैंक घोटाले और साल 2016 में हुई नोटबंदी से जुड़ी कुछ बातों का जवाब देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर उर्जित पटेल को वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति में उपस्थित होना पड़ा। यहां उर्जित पटेल से कई सवालों के जवाब मांगे गए, जिनमें नोटबंदी के बाद बैंकों में वापस आये नोटों के आंकड़ों सहित अन्य मुद्दे शामिल थे।

चार साल बाद भाजपा ने साफ़ किया ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ अभियान…

उर्जीत पटेल

गौरतलब है कि 8 नवंबर, वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकाएक नोटबंदी की घोषणा कर दी थी। पीएम ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद किए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद ही इस संसदीय समिति का गठन किया गया था।

खबरों के मुताबिक़ समिति के सदस्यों ने आरबीआई गवर्नर से पूछा कि घोटाले के बारे में कैसे पता नहीं चला। साथ ही समिति ने बैंकों में बढ़ते एनपीए पर भी चर्चा की। इस पर पटेल ने स्थायी समिति को बताया कि बैंकिंग क्षेत्र के एनपीए संकट को हल करने के लिए उपाय शुरू किए गए हैं।

फंस गए राहुल गांधी! RSS मानहानि केस में अदालत ने तय…

वहीं विपक्ष पहले ही पीएम द्वारा की गई नोटबंदी को महाघोटाला करार दे चुकी है। लेकिन आरबीआई और सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करते रहे। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि सरकार के इस कदम से देश में कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

खबरों की मानें तो रिजर्व बैंक के गर्वनर उर्जित पटेल को पूछताछ के लिए बुलाने का फैसला अप्रैल में हुई कमिटी की मीटिंग में लिया गया था।

इस मीटिंग में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वीरप्पा मोइली के अलावा कई अन्य सांसदों ने भी हिस्सा लिया था।

बीते कुछ वक्त में लगातार सामने आए बैंकिंग घोटालों से सरकार दबाव में थी। इन बैंकों में पंजाब नेशनल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक समेत अन्य कई बैंक शामिल थे।

बता दें उर्जित पटेल पहली बार संसदीय समिति के सामने पेश नहीं हुए हैं। इससे पहले भी उन्हें कई बार समिति के सवालों का सामना करना पड़ा है।

उल्लेखनीय है कि इन्हीं मुद्दों पर चर्चा करने के लिए समिति ने उर्जित पटेल को 17 मई को अपने समक्ष पेश होने के लिए कहा था।

Related Articles