सच में थे रावण के दस सिर जानिए ऐसी बातें जो बहुत कम लोग जानते हैं

नई दिल्ली दशहरा 8 अक्टूबर को भारत में धूमधाम से मनाया जाएगा. धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था. इसी खुशी में दशहरा मनाया जाता है. दशहरा पर्व को अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाया जाता है.  ये बात तो हम सभी जानते हैं लेकिन रावण से जुड़ी कुछ बातें ऐसी भी हैं जो बहुत ही कम लोग जानते हैं. कहा जाता है कि रावण के दस सिर थे. लेकिन क्या सच में यह सही है|विदेशों में भी मनाया जाता है Dussehra, कहीं कहा जाता है ‘Golu’ तो कहीं दी जाती है बलि 

कुछ विद्वान मानते हैं कि रावण के दस सिर नहीं थे किंतु वह दस सिर होने का भ्रम पैदा कर देता था इसी कारण लोग उसे दशानन कहते थे. जैन शास्त्रों में उल्लेख है कि रावण के गले में बड़ी-बड़ी गोलाकार नौ मणियां होती थीं. उक्त नौ मणियों में उसका सिर दिखाई देता था जिसके कारण उसके दस सिर होने का भ्रम होता था.

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मान्यताओं के मुताबिक, मेघनाथ के जन्म से पहले रावण ने ग्रह नक्षत्रों को अपने हिसाब से सजा लिया था, जिससे उसका होना वाला पुत्र अमर हो जाए. लेकिन आखिरी वक़्त में शनि ने अपनी चाल बदल ली थी. रावण इतना शक्तिशाली था कि उसने शनी को अपने पास बंदी बना लिया था. वाट्सऐप और फेसबुक के लिए सबसे बढ़िया 10 Dussehra Statu

रावण को वेद और संस्कृत का ज्ञान था. वो साम वेद में निपुण था. मान्‍यता है कि उसने शिवतांडव, युद्धीशा तंत्र और प्रकुठा कामधेनु जैसी कृतियों की रचना की. साम वेद के अलावा उसे बाकी तीनों वेदों का भी ज्ञान था. इतना ही नहीं पद पथ में भी उसे महारत हासिल थी. रावण को संगीत का भी शौक़ था. रुद्र वीणा बजाने में रावण को हराना लगभग नामुमकिन था. रावण जब भी परेशान होता वो रुद्र वीणा बजाता था.

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