स्मृतिविशेष: इन ‘अटल’ फैसलों ने ‘वाजपेयी’ को बनाया युग पुरुष

भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नही रहे। देश की राजनीति में अपनी अलग छवि बनाने वाले वाजपेयी का गुरुवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अस्पताल में निधन हो गया। उनके यूं चले जाने से देश ने एक युग पुरुष खो दिया। अटल एक ऐसे नेता थे जो भाषा, विचार और संस्कृति के भेद से बिल्कुल परे रहेे। आइए जानिए उनकी जिंदगी के कुछ बड़े फैसले और अहम पल…

राजनीति के ‘अटल’ नेता

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। उनके पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी कवि और अध्यापक थे और मां कृष्णा देवी घरेलू महिला थीं।

अनूठी शख़्सियत

  • पत्रकार, कवि और राजनेता के साथ 11 भाषाओं के जानकार थे अटल
  • मित्र जीवन में वामपंथी विचारधारा से प्रेरित थे। 1939 में संघ से जुड़े।
  • 1977 में यूएन में हिंद् में भाषण देने वाले पहले व्यक्ति
  • चार राज्यों (यूपी, दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात) से बने सांसद
  • पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर कांग्रेस प्रधानमंत्री

वाक्य विशेष

  • 1971 में पाक के घुटने टेकने पर इंदिरा गांधी की खुलकर की थी तारीफ।
  • नवाज शरीफ ने कहा था अटल जी तो पाक में भी चुनाव जीत सकते हैं।
  • कारगिल विवाद पर अमेरिका से कहा था कि पाक सेना हटाए नहीं तो हम सीमा पार करेंगे।
  • जय जवान, जय किसान में जय विकास को जोड़कर दिया नया नारा।
  • अटल ने पिता के साथ की थी कानून की पढ़ाई। राष्ट्रधर्म पत्रिका के लिए अधूरी छोड़ी थी पढ़ाई

अहम पड़ाव

  • 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में लिया हिस्सा, 23 दिन जेल में रहे
  • 1954 में कश्मीर मुद्दे पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी संग अनशन पर बैठे
  • 1957 में यूपी के बलरामपुर से चुनाव जीत पहली बार सांसद बने
  • 1996 में 16 मई को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली
  • 2005 में सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा की

अहम फैसले

  • 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण विस्फोट कर सभी को चौंकाया।
  • 1999 में दिल्ली से लाहौर के बीच बस सेवा की शुरुआत की।
  • 2000 में दूरसंचार क्षेत्र में क्रांति लाने वाली नीति बनाई।
  • 2001 में बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने का कानून बनाया।
  • 2004 में कश्मीर मद्दे के हल के लिए अलगाववदियों से वार्ता शुरु की।

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