‘3 स्टीरोज’ से बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं रेणुका शहाणे

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नई दिल्ली: 90 के दशक में दूरदर्शन के साप्ताहिक कार्यक्रम ‘सुरभि’ से शोहरत बटोर चुकीं रेणुका शहाणे ‘3 स्टीरोज’ से बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। लंबे समय बाद बड़े पर्दे का रुख कर रहीं रेणुका यह महसूस कर हैरान हैं कि फिल्म इंडस्ट्री बहुत बदल गई है। वह कहती हैं कि फिल्मों में काम करने के लिहाज से इसे महिलाओं का स्वर्णिम युग कहा जा सकता है।

रेणुका कहती हैं, “इस समय महिला कलाकारों को सशक्त किरदार निभाने के मौके मिल रहे हैं, जो पहले हमारी कल्पना से भी परे थे। फिल्म इंडस्ट्री खुशकिस्मत है कि इस दौर में ऐसी कई अभिनेत्रियां भी हैं, जो इन ऐतिहासिक किरदारों में जान डाल रही हैं।”

रेणुका ने सूत्रों से बातचीत में कहा, “सुरभि मेरे करियर में मील का पत्थर साबित हुआ, लेकिन इस तरह का शो अब बनना मुश्किल है, इसकी वजह है कि अब तमाम तरह के चैनल आ गए हैं, लाइफस्टाइल से लेकर फूड चैनलों तक की भरमार है। हम सुरभि में एक ही एपिसोड में पकवानों से लेकर ऐतिहासिक स्मारक और खास शख्सियतों तक सबकुछ पेश करते थे, लेकिन अब इतना डिवीजिन आ गया है कि यह फॉरमेट आसान नहीं है। ऊपर से कोई भी प्रायोजक या निर्माता इस तरह के फॉरमेट पर पैसे खर्च नहीं करना चाहता। इसलिए अब सुरभि जैसा शो नहीं बन सकता।”

 रेणुका कहती हैं, “मुझे फिल्म की स्क्रिप्ट बहुत अच्छी लगी। लंबे समय बाद आप काम कर रहे तो आपकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है, ऐसे में कोशिश रहती है कि जो भी करो, असरदार हो। इस तरह की स्क्रिप्ट मिलना ही मेरे लिए भाग्य की बात थी, ऊपर से मेरा किरदार भी हटके है।”

वह कहती हैं, “फिल्म में मेरा किरदार एक रहस्यमयी महिला का है, जिसे आप फिल्म में छोटी उम्र से लेकर अधेड़ उम्र तक की महिला के रूप में देखेंगे। मेरे उम्र के पड़ाव की अलग-अलग कहानी है। किरदार में ह्यूमर भी है। अमूमन, महिला किरदारों में ह्यूमर देखने को नहीं मिलता। इस किरदार में ठहराव है, संयम है। मेरे किरदार को मोहल्ले की सारी बातें पता होती हैं, लेकिन मेरे अतीत के बारे में कोई नहीं जानता इसलिए मुझे ‘मिस्ट्री आंटी’ भी कहते हैं।”

वह कहती हैं, “हमारी इंडस्ट्री बदल गई है। इसकी एक वजह इंटरनेट भी है। आज इंटरनेट पर हर चीज देखी जा सकती है। नए आइडियाज मिल रहे हैं। कंटेंटमेकर की जिम्मेदारी बढ़ गई है। इंटरनेट के दौर में लोगों को ऐसी चीजें दिखाने की जिम्मेदारी बढ़ गई है, जो उन्होंने पहले नहीं देखी। इसलिए कंपटीशन बढ़ गया है। दूसरी बात, आज के दौर में महिलाओं को बहुत सशक्त भूमिकाएं मिल रही हैं। हमारी खुशकिस्मती भी है कि ऐसी अभिनेत्रियां भी हैं, जो उस तरह के किरदार बेहतरीन तरीके से निभा रही हैं। इस दौर को महिलाओं के लिए स्वर्णिम युग कहा जा सकता है।”

 

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