बिल्डरों को जिम्मेदारी और ग्राहकों को सुरक्षा प्रदान करेगा रेरा

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आगरा। रियल एस्टेट में बहुत सी चीजें रेग्यूलेट नहीं हो रहीं। यही वजह है कि केन्द्र सरकार ने इस क्षेत्र में चीजों को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से रेरा (रीयल एस्टेट रेग्यूलेशन एंड डवलपमेंट एक्ट) लागू किया है। जिसमें ग्राहकों को सुरक्षा और बिल्डरों की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। लेकिन बिल्डरों को घबराए नहीं बल्कि नियमों का अनुपालन करें। यह बात संजय प्लेस स्थित होटल पीएल पैलेस में जयपुर से आए सीए व रेरा एक्पर्ट हिमांशु गोयल ने क्रेडाई द्वारा आयोजित कार्यशाला में कहीं।

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रेरा के बाद जिनके पास ग्राहक को देने के लिए उपयुक्त सुविधाएं हैं, वहीं बिल्डर होगा। हर कोई बिल्डर नहीं बन पाएगा। ग्राहक के सभी अधिकार होंगे। हिमांशु गोयल ने बताया कि रेरा बिल्डरों के दायित्वों व ग्राहकों के अधिकारों की बात करता है। एक्ट के मुताबित समय पर प्रोजेक्ट पूरा न करने वाले बिल्डरों पर मेंटिनेंस और इसके स्ट्रक्चर की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी होगी। प्रोजेक्ट पूरा न होने पर आवंटी की ओर से जमा की गई रकम ब्याज के साथ वापस करनी होगी। यह नियम सरकार पर भी लागू होंगे। यानि एडीए को भी रेरा के नियमों को पालन करना होगा।

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एडीए सचिव हरिराम जी ने क्रेडाई को रेरा व जीएसटी के तहत आने वाली सभी समस्याओं में वैध मदद देने की बात कही व इस तरह के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि जो भ्रांतियां हैं, न्हें दूर करने के लिए इस तरह के आयोजन होना आवश्यक है। अतिथियों का स्वागत क्रेडाई अध्यक्ष भरत सिंह बघेल ने किया। मंचासीन अतिथियों में रेडिको अध्यक्ष किशन चंद जैन, आर्केटेक्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष समीर गुप्ता, यूपी इंजीनियरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत फौजदार आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन क्रेडाई निर्वाचित अध्यक्ष सुमित विभव व सचिव उमेश शर्मा ने किया।

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रेरा में आम आदमी को होगा फायदा

विशेषज्ञों ने बताया कि रेरा में आम आदमी को पायदा है, मगर बिल्डरों पर जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। रेरा में उन बिल्डरों को हर हाल में रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जो ग्राहकों से रकम लेकर फ्लैट तैयार कर रहे हैं। अगय वह खुद निवेश कर रहे हैं, तो रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं। लेकिन जब वह फ्लैट को बेचने के लिए मार्केट में लॉंच करेंगे तक रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। जितनी रकम वह ग्राहक से लेंगे उसका 70 प्रतिशत अलग खाते में जमा कराना होगा। इसमें से केवल 30 प्रतिशत ही वह निर्माण आदि में खर्च कर सकेंगे। यदि रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो 10 प्रतिशत तक जुर्माने के साथ अदालती कार्रवाई का सामना करना होगा।

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ये रहे उपस्थित

शोभिक गोयल, छोटेलाल बंसल, विकास फौजदार, रवि शंकर अग्रवाल, सुशील गुप्ता, बीडी अग्रवाल, राम विनोद, गिरीश गोयल, अखिलेश गौड़, शलभ शर्मा, वीके गर्ग, केक गौतम, गौतम रावत, अनुराग अग्रवाल, महेश अग्रवाल, शेखर अग्रवाल, नितिश गर्ग, आर्केटेक्ट यशवीर सिंह, सुनील चतुर्वेदी, इंद्रचंद जैन, गोविन्द अग्रवाल, विकास सिंह, देवेश शुक्ला, पवन सिंह।

जानकारी

-500 वर्गमीटर से कम व 8 यूनिट (8 फ्लैट) से कम पर रेरा नहीं लगेगा।

-रीसेल पर रेरा नहीं लगेगा।

-किसी भी तरह की मार्केटिंग के लिए रेरा में रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

रेरा एक्ट केन्द्र सरकार ने बनाया है लेकिन नियम स्टेट के हैं।

-यदि मैन्टेनेंस लोकल अथॉरटी को दे दी है तो आप रेरा से बाहर हैं।

-27 अक्टूबर 2016 तक 60 प्रतिशत रजिस्ट्री होने पर रेरा से बाहर हो सकते हैं।

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