शोध: दालचीनी का तेल ‘सुपरबग’ से लड़ने में करेगा मदद

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नई दिल्ली। दालचीनी के तेल में पाया जाने वाला एक घटक सिन्मेल्डिहाइड सबसे प्रभावी एंटीबायोटिक्स का प्रतिरोध करने वाले जीवाणुओं के विकास को रोककर सुपरबग से लड़ने में मदद कर सकता है। ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता ने ऐसा शोध में पाया है।

स्विनबर्न विश्वविद्यालय के चिकित्सक संजीदा हालिम टोपा ने ज्यादातर वायरल संक्रमण के प्रतिरोधी होने के साथ पाया कि सिन्मेल्डिहाइड को पुरानी बॉयोफिल्म सुपरबग्स (बॉयोफिल्म मीडिएटेड सुपरबग्स) के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स का विकल्प विकसित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। सिन्मेल्डिहाइड, दालचीनी के विशेष स्वाद के लिए जिम्मेदार है।

टोपा ने कहा, “हालांकि, पहले के बहुत से शोध में दालचीनी के तेल की सूक्ष्मजीव निवारक होने की बात कही गई है, लेकिन इसका फार्माश्युटिकल उद्योग में व्यापक इस्तेमाल नहीं किया गया।”

उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य इस तेल की आणविक गतिविधि की खोज करना है, जो इसके प्रमुख घटक सिन्मेल्डिहाइड पर केंद्रित है। यही यौगिक दालचीनी को स्वादयुक्त बनाता है।”

पुराने जीवाणु संक्रमणों के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स के विकल्पों को विकसित करने की शीघ्र जरूरत है। टोपा जीवाणु को मारने के बजाय बायोफिल्म को बनने से रोकने के लिए जीवाणु संचार को बाधित करके जीवाणु के व्यवहार को बदलने की सोच रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हमारा अनुमान है कि प्राकृतिक सूक्ष्मजीवनिवारक (एंटीमाइक्रोबायल) जैसे आवश्यक तेल, बायोफिल्म के निर्माण में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इस प्रकार हमने विभिन्न बायोफिल्म विकास चरणों में सिन्मेल्डिहाइड की विभिन्न मात्रा के प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया है।”

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