रिसर्च : जेनेटिक डिसआर्डर की वजह से होता है डायबिटीज

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लंदन। अमेरिका के वैज्ञानिकों ने मधुमेह से जुडे ऐसे जीन की खोज की है जिससे यह पता चला है कि इंसानों में यह बीमारी आनुवंशिक विकार के कारण होती है। यह जीन इंसुलिन के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं इस खोज के बाद मधुमेह के उपचार की खोज की जा रही है।

मधुमेह

बता दें, अपनी इस बड़ी खोज पर वैज्ञानिकों ने बताया कि उन्‍होंने एक ऐसे जीन की खोज की है जिससे यह पता चला कि मधुमेह के सबसे सामान्य रूप (टाइप 1 या टाइम 2) से पीडि़त लगभग दो प्रतिशत लोगों में यह बीमारी आनुवंशिक विकार की वजह से होती है। यह जीन इंसुलिन का उत्‍पादन करने वाली कोशिकाओं के कार्य को प्रभावित करता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन कोशिकाओं को बीटा कोशिका कहते हैं।

अमेरिका स्थित वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी, ब्रिटेन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन और यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीटर के शोधकर्ताओं ने मधुमेह से जुड़े ऐसे मामलों का अध्ययन किया, जिसमें ये बीमारी आनुवंशिक रूप से मिली थी। अपनी रिसर्च में उन्‍होंने पाया कि अगर परिवार के किसी सदस्य को ये बीमारी होने पर वह किस तरह अगली पीढ़ी को प्रभावित करती है।

शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में निकले निष्‍कर्ष में बताया कि जब परिवार में कोई मधुमेह से पीडि़त होता है तब उस परिवार के सदस्‍य के अग्नयाश्य में इंसुलिन प्रोड्यूसिंग ट्यूमर उत्पन्न होता है। यही इंसुलिन ट्यूमर अगली पीढ़ी के सदस्‍य को प्रभावित करता है जिसे इंसोलिनोमस कहते हैं। वहीं ब्‍लड में सुगर की मात्रा कम हो जाने से इंसोलिनोमस उत्‍पन्‍न होता है लेकिन यहां ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने से ऐसा होता है।

इस तरह रिसर्च में पाया गया कि इन दोनों रोगों का कारण एक ही जीन था, जिसका असर इंसुलिन द्वारा उत्पन्न होने वाली बीटा कोशिकाओं पर पड़ता है। वहीं शोधकर्ताओं ने जीन की पहचान की और उसे एमएएफए नाम दिया है।

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