शोध: कोरोना को हराने वाले हो रहे मानसिक रूप से बीमार, कोमा में जाने तक का है खतरा

शिकागो: भारत ही क्या दुनिया भर में कोरोना कहर बरपा रहा है। लोगों की सोच से भी ज्यादा खतरनाक कोरोना वायरस शारीरिक ही नहीं मानसिक रूप से भी लोगों को बीमार कर रहा है। एक तो अभी तक दुनिया के वैज्ञानिक कोरोना वायरस को हराने के लिए वैक्सीन बनाने की जुगत में है। वहीँ दूसरी तरफ मानसिक रूप से इसका मरीज़ों पर हावी होना ज्यादा चिंताजनक है। इसको लेकर शिकागो के नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन में न्यूरो-संक्रामक रोग के प्रमुख इगोर कोरलनिक ने अपने शोध में दावा किया है।

जो लोग कोरोना से स्वस्थ हो चुके थे उसके बाद भी उनकी मौत हो गई उसका कारण वायरस का मरीज़ के मस्तिष्क पर गहरा आघात करना है। शोध में ये बात सामने आई है कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों में से अस्‍पताल में भर्ती हर 5 में से 4 मरीज के अंदर न्‍यूरोलॉजी संबंधी लक्षण पाए गए हैं। रिसर्च के अनुसार यह खतरनाक वायरस अब इंसानों के तंत्रिका तंत्र को भी नुकसान पहुंचा रहा है। इन लक्षणों में मांसपेशियों में दर्द, सिर दर्द, भ्रम, चक्‍कर आना, स्‍वाद का न रहना शामिल हैं।

मानसिक तनाव को लेकर शोध में क्या है ?

शोध में शामिल रिसर्चर शिकागो के नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन में न्यूरो-संक्रामक रोग के प्रमुख इगोर कोरलनिक के अनुसार इसमें हल्के मानसिक तनाव से लेकर कोमा तक की स्थिति शामिल है। शोध में अस्पताल में भर्ती 509 कोरोना मरीजों में न्यूरोलॉजिक लक्षणों की गंभीरता को दर्शाया है। शोध में बताया गया कि कोरोना मरीज के ठीक होने के बाद मेन्टल स्ट्रोक का शिकार होना, नसों में शिथिलता, लकवा, चेहरे का टेढ़ापन और एक आंख का ठीक से न खुलना आदि परेशानियां शामिल हैं।

ये भी पढ़ें : सपना चौधरी बनी माँ, पति वीर ने सोशल मीडिया पर शेयर की गुडन्यूज

Annals of Clinical and Translational Neurology में छपी स्टडी के हवाले से कहा गया कि जिन लोगों को माइल्ड सांस संबंधी समस्याएं या लक्षण हैं, जो लंबे समय तक नहीं रहती हैं, वे अभी भी लंबे समय से लक्षणों के खतरे में हैं। रिर्सच में कहा गया कि अगर डॉक्टरों को मस्तिष्क से जुड़े लक्षण और बीमारियों के संकेत संक्रमण से ठीक हुए लोगों में नजर आए तो समय रहते पहचान कर उपचार और देखभाल के लिए तैयार रहें।

Related Articles