खुलासा! परमाणु हथियार जमा कर रहा है पाकिस्तान, भारत है निशाने पर

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बर्लिन. टेरर फंडिंग मामले में ग्लोबल टेरर वाचडॉग FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा है जिसके बाद पीएम इमरान खान बड़ा झटका लगा है. इससे पहले बुधवार को अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान में आज भी आतंकवादी खुले घूम रहे हैं. अब जर्मनी सरकार की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत से मुकाबले के लिए पाकिस्तान लगातार परमाणु हथियार जमा कर रहा है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एक तरफ जहां पूरी दुनिया परमाणु निरस्त्रीकरण की तरफ बढ़ रही है वहीं पाकिस्तान लगातार अपने परमाणु बमों के जखीरे में इजाफा कर रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के इतिहास को देखते हुए ये काफी खतरनाक है क्योंकि ये हथियार सुरक्षित नहीं हैं. जर्मन सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के इन परमाणु हथियारों के निशाने पर भारत ही है. प्रोटेक्शन ऑफ़ कॉन्सटीट्यूशन फॉर द जर्मन स्टेट बादेन- रेटमबर्ग की वार्षिक रिपोर्ट 16 जून को प्रकाशित की गई है जिसमें पाकिस्तान के परमाणु बमों के जखीरे पर कई सवाल खड़े किये गए हैं.

ईरान, पाकिस्तान और नॉर्थ कोरिया से खतरा
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और सीरिया जैसे अभी भी न्यूक्लियर, केमिकल हथियारों का भंडार बढ़ाने में लगे हुए हैं. इसके लावा ये देश इन्हें बनाने के लिए जरूरी अन्य प्रोडक्ट्स और डिलीवरी सिस्टम पर भी काम कर रहे हैं . इन सभी का लक्ष्य इन हथियारों की संख्या को बढ़ाना, इनकी रेंज को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना और इन्हें ऐसा बनाना है कि ये ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचा सके. पाकिस्तान लगातार नए वेपन सिस्टम्स पर भी काम कर रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे हथियारों को बनाना और इनके प्रसार को बढ़ावा देना अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा है.

भारत लगातार करता रहा है दावा
बता दें कि भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ये दावा करता रहा है कि पाकिस्तान लगातार परमाणु हथियार बना रहा है और उन्हें भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने की साजिश रच रहा है. इस रिपोर्ट में भी भारत के दावे को सही ठहराते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान ये सभी नए हथियार, परमाणु बम और वेपन सिस्टम भारत को ध्यान में रखकर ही बना रहा है. इस हथियारों के निशाने पर सबसे पहले भारत ही होगा. इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान ने जर्मनी की कई कंपनियों से इन हथियारों को बनाने के लिए रॉ मटिरियल और अन्य सामान खरीदा है. किसी आगामी खतरे से बचने के लिए जर्मनी ने इन सभी जानकारियों को साझा करने का निर्णय लिया है.

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