Kriti Sanon की फिल्म ‘Mimi’ का रिव्यू

कृति सेनन (Kriti Sanon) की फिल्म ‘Mimi’ के लीक होने के बाद मेकर्स को आनन-फानन में शेड्यूल से चार दिन पहले ही इसे रिलीज़ करना पड़ा। यह फ़िल्म 2011 में रिलीज राष्टीय पुरस्कार प्राप्त मराठी फिल्म 'मला आई वहायच' का हिंदी रिमेक है।

लखनऊ: कृति सेनन (Kriti Sanon) की फिल्म ‘मिमी’ के लीक होने के बाद मेकर्स को आनन-फानन में शेड्यूल से चार दिन पहले ही इसे रिलीज़ करना पड़ा। यह फ़िल्म 2011 में रिलीज राष्टीय पुरस्कार प्राप्त मराठी फिल्म ‘मला आई वहायच’ का हिंदी रिमेक है। कौमेडी प्लस इमोशन का कैम्बीनेशन जिसकी फिल्में अपने बॉलिवुड में सबसे ज्यादा चलती है। ऐसी फिल्मे हमेशा डिमांड में रहती है। लेकिन जितना आसान ये Subject दिखता है उतना हि कठिन है इसको फिल्म की शकल देना। सिनेमा की दुनिया में, किसी को हसा के रूलाना या रूला के हसाना ये सबसे बड़ा चैलेंज है। फिल्म मिमी यानी ‘Desi Writing With Funny Oneliner’।

बात करते है Mimi के डायरेक्ट और थीम की

इस फिल्म को लक्ष्मण उटेका ने डायरेक्ट किया है। लीड रोल में है पंकज त्रीपाठी, कृती सेनन, साई तम्हंकर, और सुप्रिया पाठक है। फिल्म ने हसते हसाते एक बहुत ही अच्छा सोशल मैसेज दिया है, की किस तरह अनाथ आश्रम में 150 मिलीयन बच्चे किसी न किसी पेरेंटस का इंतजार कर रहे हैं और हमार समाज या विज्ञान किस तरह के उपाय पर उपाय लगाते है खुद के बच्चे होने के लिए।

क्या है फिल्म की स्टोरी

देखिए, फिल्म राजस्थान की रहने वाली मिमी की है। जो पेशे से एक डांसर है। जिसका सपना बॉलीवुड में अभिनेत्री बनने का है। वो मुम्बई जाने के लिए पैसे जमा कर रही है। इसी बीच उनकी मुलाकात होती है ड्राइवर भानु से। भानु उन्हें 20 लाख रूपये कमाने का तरीका बताते वो भी केवल नौ महीने में। एक अमेरिकन दंपति के बच्चे की सरोगेट मां बन कर। पहले तो किसी और की मां बनने को सुन कर भानु को कशकर एक कनटाप लगाती है। फिर पैसे को देखकर अपने सपनों को पूरा करने के लिए मिमी तैयार हो जाती है। बस नौ महीने की कुरबानी फिर जिंदगी बन जाएगी Similar to मुकेश अंबानी। हुआ ये लीड एक्टेस कृती का जो कैरेक्टर है वो शुरूआत में खुद पेग्नेंसी का नाम सुन कर मुह छिपा लेती है। फिर धिरे धिरे पुरी ऑडियेंस को अपने साथ समझदार बनाना शुरू करती है।

अब बात करते है फिल्म की पॉजेटीव पॉंट्स की

मिमी कम्पलीट एक इमोशनल फैमली फिल्म है, Silent इमोशन जिसको बोलने की जरूरत नहीं पड़ती। जैसे मानो चेस के गेम की तरह एक एक चाल एकदम सहीं जगह पर है। सोच समझ कर एकदम सहीं तरह से चली गई है। राजा, रानी, ऊट, सिपाही सब के सब जींदा बच गए। पंकज त्रीपाठी बिना किसी इफौड  वाली नॉचुरल एक्टिंग। सपोरटिंग कैरेक्टर भी बहुत शानदार है इस फिल्म के।

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अब बारी आती है फिल्म के नेगेटिव पॉंट्स की

दो चीजें है जो फिल्म में आपको थोड़ा सा खटक सकता है। पहली बात मिमी की जींदगी बाहर से जीतनी Difficult और Challenging दिखती है अंदर से उतना कठीन और मुश्कील कुछ भी नहीं है। दूसरा इंडियन पैरेंट्स जो की कुछ ज्यादा ही Supportive है बेटी ने शादी कर ली, पैग्नेंट हो गई, Age से Double पति भी आ गया लेकिन पेरेंटस के तेज आवाज में गुस्से वाला डॉलॉग तक सुनने को नहीं मिलेगा। और हां, एक छोटी सी एडवाइड अगर फिल्म का ट्रेलर अभी तक नहीं देखा हो तो भूल जाओ की ये Youtube पर एग्सीस्ट भी करती है। और डायरेक्ट जा कर मूवी देखिये।

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