ऊंट पर सवार होकर शिक्षक जा रहे हैं छात्रों के घर पढ़ाने

राजस्थान के बाड़मेर में शिक्षक ऊंटों पर सवार होकर ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे छात्रों को पढ़ा रहे हैं

जयपुर: राजस्थान के बाड़मेर (Barmer) में शिक्षक ऊंटों पर सवार होकर ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे छात्रों को पढ़ा रहे हैं। एक छात्र ने बताया, “हमारे यहां नेटवर्क नहीं आता इसलिए हमारे गुरुजी ऊंट (Camel) पर सवार होकर हमें यहां पढ़ाने आते हैं।”

बाड़मेर की स्थापना

बाड़मेर राजस्थान राज्य का एक जिला है। जिले का मुख्यालय बाड़मेर है। बाड़मेर की स्थापना 13वी शदी मे राव बाहड राव परमार ने की और उन्ही के नाम पर बाड़मेर नाम पड़ा। बाहड़ राव परमार जूना बाड़मेर के शासक थे और जूना बाड़मेर की पहाडी पर ही बाहड़ राव परमार ने एक छोटे से किले का निर्माण भी कराया जो जूना बाड़मेर गढ़ नाम से जाना जाता था।

जूना बाड़मेर वर्तमान बाड़मेर शहर से 25 km दूर स्थित है। परमारो के बाद जूना बाहड़मेर पर चौहानो का अधिपत्य हुआ। उसके बाद रावत लूंका ने अपने भाई रावल मंडलीक की सहायता से चौहान शासक (राव मुंधा जी) से बाड़मेर जीता और जूना बाहडमेर में अपना राज्य स्थापित कर जूना को अपनी राजधानी बनाया।

रावत भीम ने 15से 16 ईस्वी के बीच अपनी राजधानी को जूना बाड़मेर से स्थानान्तरित किया एंव वर्तमान बाड़मेर शहर की स्थापना की और नया बाडमेर बसाया व पहाडी दुर्ग का निर्माण कराया। पुराने बाड़मेर जूना मे स्थित को जूना बाडमेर व नये बसाये बाडमेर का नया बाडमेर कहा जाने लगा।

कालांतर मे नया शब्द धीरे धीरे हटता गया और बाड़मेर शब्द प्रचलन मे आया। 7 अप्रेल 1948 को भारत सरकार ने राजस्थान राज्य मे बाड़मेर को नया जिला बनाया।

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