गड्ढामुक्त अभियान की पोल खोल रही सीतापुर शहर की सड़कें

सीतापुर: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सीतापुर शहर (Sitapur City) की सड़कें अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। पहले से सड़कों की हालत इतनी खराब थी की लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल था, उसके बाद अमृत योजना (Amrit Yojana) ने इसे और भी खराब कर दिया है। इसकी वजह से दिन से लेकर रात तक लोगों को काफी मुश्किलोँ का सामना करना पड़ रहा हैं। कई बार तो वाहन भी अनियंत्रित होकर गिरकर जख्मी हो जाते हैं। इतना सब होने के बावजूद सीतापुर (Sitapur City) नगर पालिका के अधिकारी इन सड़कों पर कोई ध्यान नहीं दे रहे है।

शहर में सड़कों की मरम्मत की जिम्मेदारी नगर पालिका (Municipality) या पी.डब्लू.डी (PWD) की होती है। लेकिन इन दोनों में से कोई भी अपनी जिम्मेदारी सही ढ़ंग से नहीं कर रहा है। इन सड़कों की हकीकत खुद शहर की सड़कें बयां कर रहीं हैं। शहर में कम से कम 20 अधिक ऐसी सड़कें हैं जो पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। प्रतिदिन करीब 50 हजार लोगों का आवागमन इस सड़क से होता है। सड़क के गड्ढों में गंदा पानी भी भरा रहता है। जलभराव की समस्या वर्ष भर रहती है। सड़क से नगरपालिका व पीडब्ल्यूडी सहित जिले के आला अधिकारी भी गुजरते हैं। इसके बाद भी सड़क की बदहाली दूर नहीं हुई।

गुजरते अधिकारी, भूले जिम्मेदारी

बट्सगंज के पास बदहाल सड़क से सीतापुर (Sitapur City) जिले के आला अधिकारी प्रतिदिन गुजरते हैं। डीएम से लेकर विभागीय अधिकारियों की गाड़ियां भी सड़क के गड्ढों से होकर गुजरती हैं। इसके बावजूद सड़क की बदहाल दशा अब तक ठीक नहीं हुई। बट्सगंज के समीप स्थित इस सड़क की मरम्मत हर दूसरे महीने होती है। जरा सी बारिश होते ही सड़क का हाल बदहाल हो जाता है और लोग इसी सड़क से गुजरते रहते हैं। शिकायत होने के बाद फिर से मरम्मत करा दी जाती है। सड़क की समस्या का सही निदान नहीं किया जाता।

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