रोहिग्यां घुसपैठ एक साजिश

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डा. राधेश्याम द्विवेदी

गरीबी-बदहाली के बावजूद भारत बांग्लादेश सहित अनेक देशों के लिए खतरा :- रोहिंग्या मुसलमानों का अवैध रूप से कई देशों में रहना अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा था कि करीब 4,20,000 रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार को वापस लेना होगा। रोहिंग्या मुस्लिम घुसपौठिये को जम्मू-कश्मीर तथा भारत के दूसरे क्षेत्रों में उनके बसने के मुद्दे ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अनुमान है कि अभी करीब 70,000 रोहिंग्या घुसपौठिये असम, पश्चिम बंगाल, केरल, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर सहित भारत के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं। कठिनाई के वक्त किसी व्यक्ति को भोजन और आश्रय उपलब्ध कराना इंसानी स्वभाव है। इसीलिए भारत जैसे लोकतांत्रिक देश को रोहिंग्या मुस्लिम घुसपौठिये को आश्रय देना चाहिए। सवाल यह है कि भारत या जम्मू-कश्मीर सरकार इन घुसपौठिये को जम्मू-कश्मीर में ही क्यों बसा रही है, जहां इस्लाम और पाकिस्तान के कारण जिहादी प्रकृति का संघर्ष छिड़ा हुआ है?

आश्रय देने और पाने का कुचक्र :- अक्टूबर 2015 में जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा था कि जम्मू में 1219 रोहिंग्या मुस्लिम परिवारों के कुल 5107 सदस्य रह रहे हैं, जिनमें से 4912 सदस्यों को संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त द्वारा शरणार्थी का दर्जा दिया जा चुका है। जून2015 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बताया था कि म्यांमार और बांग्लादेश से आए करीब 13400 शरणार्थी राज्य के विभिन्न कैंपों में रह रहे हैं।आश्चर्य की बात है कि जहां धारा 370 के तहत किसी को रुकने ठहरने या बसने का अधिकार नहीं है जहां हिन्दू अपने घरों को वापस लौटने की स्थिति में नहीं है, वहा 5107 से यह संख्या 13400 कैसे पहुंच जाती है ? यह गौर करने लायक है कि जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात में हिन्दू पंडित कश्मीर में अपने घरों में वापस नहीं लौट पा रहे हैं, जबकि रोहिंग्या मुस्लिम म्यमार के पास ही स्थित चीन के क्षेत्र में ना जाकर वहां से दो ढ़ाई हजार किमी. का फासला तय करके कश्मीर तथा दिल्ली आदि जगहों पर साजिसन बसाये जा रहे है। यहां किसी भी तरह से आश्रय देने और पाने का यह कुचक्र रचा जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर के लिए खतरा :- ‘अलकायदा’ एक पाकिस्तानी संगठन है। 1988 में आइएसआइ की निगरानी में पेशावर में इसका गठन हुआ था। यह वही साल था जब आइएसआइ अफगानिस्तान में विजेता के रूप में उभरी थी। उसने कश्मीर में जिहाद की अपनी योजना को जन्म दिया था। जमात उद दावा, जिसे अब लश्कर-ए-तैयबा के नाम से जाना जाता है, का संस्थापक हाफिज सईद गाजा के मुस्लिमों सहित इंडोनेशिया में रोहिंग्या मुस्लिमों के शरणार्थी शिविरों में लंबे समय तक सक्रिय रहा है। हाफिज सईद की अगुआई में जमात उद दावा दुनिया के विभिन्न हिस्सों में स्थित रोहिंग्या शरणार्थियों को कंबल, भोजन और अस्थायी टेंट मुहैया कराकर स्वयं के मानवीय संगठन होने का दिखावा करता आ रहा है। यह बात पूरी तरह साफ है कि हाफिज सईद को आइएसआइ का समर्थन प्राप्त है। बहुत संभावना है कि आने वाले दिनों में यह संगठन जम्मू-कश्मीर के शरणार्थी शिविरों में रह रहे रोहिंग्या शरणाथियों के युवाओं को जिहाद के लिए प्रशिक्षण देकर भड़काने का प्रयास कर सकता है । भारत को रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को आश्रय दिया जा सकता है, लेकिन उससे सावधान भी रहना होगा। भारत एक बड़ा देश है, लेकिन जम्मू-कश्मीर वह जगह नहीं हो सकती है जहां रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाया जाना चाहिए, क्योंकि वहां होने वाले संघर्ष जिहादी प्रकृति के होते हैं।

जम्मू कश्मीर में सबसे ज्यादा संख्या में लगभग 10,000 रोहिंग्या मुस्लिम हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 14,000 रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थी के रूप से भारत में रह रहें है। भारत सरकार ने इन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा शरणार्थी कहे जाने पर आपत्ति जताई है। ये लोग कई सालों से यहां रह रहे हैं और झुग्गी झोपड़ियों में रहते हुए छोटे-मोटे काम करके अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं. पिछले दो-तीन महीनों में जम्मू में कुछ हिंदुत्ववादी राजनीतिक और व्यापारिक संगठनों ने उन्हें जम्मू से बेदखल करने की मुहिम छेड़ दी है। उनका दावा है कि रोहिंग्या मुसलमान जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों और सुविधाओं का फ़ायदा उठा रहे हैं।

भारत के लिए खतरा :- भारत में रोहिंग्या देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। कुछ रोहिंग्या मुसलमान, आंतकवादी समूहों से जुड़े हैं जो जम्मू, दिल्ली, हैदराबाद और मेवात क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन क्षेत्रों में इनकी पहचान भी की गई है। सरकार ने आशंका जताई है कि कट्टरपंथी रोहिंग्या भारत में बौद्धों के खिलाफ भी हिंसा फैला सकते हैं। इनका संबंध पाकिस्तान और अन्य देशों में सक्रिय आतंकवादी संगठनों से है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों मुताबिक भारत में तकरीबन 16 हजार रोहिंग्या मुसलमान रह रहे हैं लेकिन असल में इनका आंकड़ा तकरीबन 70 हजार तक पार कर सकता है। अल-कायदा के संदिग्ध आतंकी समीउन रहमान उर्फ सूमोन हक उर्फ राजू भाई से पूछताछ में पता चला है कि उसका असली मकसद भारत में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की एक फौज बनाकर उन्हें म्यांमार आर्मी के सामने खड़ा करना था।

रहमान रोहिंग्या मुसलमानों की सेना बनाने के लिए मणिपुर या मिजोरम में ट्रेनिंग कैंप भी स्थापित करना चाहता था। इस फौज को हथियार अल-कायदा से मिलने थे। सितंबर में फेस्टिव सीजन शुरू होने वाला है। जांच की जा रही है कि वह कहीं दिल्ली-एनसीआर में रामलीलाओं, दुर्गा पूजा, दशहरा या फिर दिवाली पर कोई आतंकवादी हमला तो नहीं करने वाला था ? द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पूछताछ के दौरान रहमान ने कबूला है कि बांग्लादेश की जेल में रहने के दौरान उससे अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सहयोगियों ने संपर्क किया था। इससे भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसियों के उन दावों की पुष्टि होती है, जिनके मुताबिक डी-कंपनी आईएसआई की मदद से भारत में आतंकी गतिविधियों को हवा दे रही है। हाल ही में इंटेलिजेंस एजेंसियों ने डी-कंपनी से जुड़े एक अन्य मेंबर शम्सुल हुदा की भारत में रेल दुर्घटनाओं में भूमिका होने में आशंका जताई थी।

भारत में अंतरराष्टरीय संगठन विपक्षी तथा वाम पार्टियों ने मुहिम छोड़ रखी :- मुस्लिम कट्टरपन्थी दुनिया के मुस्लिमों को बुलावा दे रहे हैं. आओ लड़कर काफिरो से म्यांमार मे बिल्कुल इराक वाला महौल बनाओ और अब ये बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया आदि इस्लामिक मुल्क मे ना जाकर भारत मे घुसपैठ करो. यहां उनकी संख्या 70 हजार के ऊपर है. रोहगिया मुस्लिमों के द्वारा अवैध रूप से फेसबुक, वाटसऐप और अन्य सोशल मिडीया के द्वारा एक मुहीम चल रही है, जिसमे कहा जा रहा रोहगिया मुस्लिम भारत के ही नागरिक हैं उनको अपना हक समझकर भारत मे रहना चाहिए. इसमे वही बुद्धिजीवी वर्ग शामिल है जो याकूब के मे थे जैसे शोभा डे, रवीश कुमार एनडीटीवी, बरखा दत्त एनडीटीवी, राजदीप सरदेसाई आजतक, अंजना ओम कश्यप आजतक, पुन्य प्रसुन बाजपेई आजतक, राहुल कवर आजतक, एबीपी न्यूज, बालिवुड नेता शत्रुघ्न सिन्हा, महेश भटट, शाहरुख, आमिर जैसे कलाकार नेता कम्युनिस्ट पार्टी, कांग्रेसी, सपाई, बसपाई ये सब सम्मिलित है।

मोदी सरकार यह भविष्य देख रही की पहले ये शरणार्थी के रूप मे रहेगे बाद मे आतंकवाद फैलायेगे। जैसे इराक ओर सीरीया से गये मुस्लिम फ्रांस, जर्मनी, बर्लिन, अमेरिका मे ISIS के रूप मे आतंकवाद फैला रहे हैं। यै सब गये थे शरणार्थी के रूप मे और आज मालिक बनकर घूम रहे हैं। फ्रांस ओर जर्मनी ने इन शरणार्थीयो को भगा दिया हैं। आतंकवादी घटनाओ को देखकर अब भारत मे प्रशांत भूषण जैसे वकील इनको ठहराने की व्यवस्था कर रहे हैं, जो की भारत ओर भारतीयों के लिए खतरा है। जो मुस्लिम नही नाही मुस्लिम धर्म से ताल्लुक रखते है। उनके लिए आने वाला भविष्य कोढ़ हो जाएगा।

मुस्लिम देश अपनाने से इनकार :- आज जबकि दुनिया के 56 मुस्लिम देशों में से कोई एक पाकिस्तान और बांग्लादेश भी इन्हें अपने यहाँ घुसने भी नहीं दे रहा, भारत के कुछ दलाल ,मीडिया और तथाकथित सैकुलर नेता इन्हें भारत में बसाना चाहते हैं, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट में केस भी दायर किया जा चुका है, सुप्रीम कोर्ट ने केस मंजूर भी कर ली है, जिसकी सुनवाई जल्द ही होने वाली है। सरकार का कहना है कि रोहिंग्या मुसलमानों में आइएस के लोगों के शामिल होने की आशंका है। मतलब सरकार सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें देश में शरण नही देना चाहती है। देश के कई एजेंसियों ने इस बात का अलर्ट जारी किया है कि रोहिंग्या मुसलमान देश की शान्ति भंग कर सकते है ऐसे में इन्हें देश में शरण देना ठीक नही है।

वोट के लिए दिखावटी हमदर्दी :- रोहिग्या के पक्ष का वकील प्रशांत भूषण है, जो हिन्दुत्व से नफरत करते हैं। जो हिन्दू देवी देवताओं के बारे में हमेशा उल्टा सीधा बोलते रहते है। भारत के इन तमाम राजनेताओं को चाहिए कि वे अपनी अपनी क्षमता के अनुसार कुछ रोहग्यिा परिवारों को गोद ले लें उन्हें अपने कोठियों व फार्म हाउसों में रहने की जगह दें। उन्हें नियमानुसार सरकार की अनुमति से नागरिकता दिलवायें। वे देश की अर्थ व्यवस्था को चैपट करने के बजाय यदि वाकई उन्हें हमदर्दी हो तो अपनी व्यक्तिगत कमाई का कोई ना कोई भाग उनके लिए खर्च करें। उनकी शिक्षा व्यवसाय के लिए कुछ करके दिखायें, पर उन्हें अपराध तथा दहशत फैलाने के लिए छुट्टे साड़ की तरह ना छोडें। वे उन्हें मात्ऱ वोट बैंक का जरिया ना समझे। ग्रेटर नोएडा और जयपुर में सब कुछ अपनी आँखों से देखा है, और यदि इन्हें देश में बसने की अनुमति मिली तो भारत को ईराक, सीरिया, अफगानिस्तान बनने से कोई भी नहीं रोक सकता। इसलिए हम सब का कर्तव्य है कि इस सब का सामूहिक रूप से विरोध करे, ताकि तथाकथित सैकुलर नेता और हमारी न्याय व्यवस्था सही पक्ष का चयन कर सके।

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