रोशनी घोटाला: जम्मू-कश्मीर को मिली राहत, हाईकोर्ट ने दिया कार्रवाई नहीं करने का निर्देश

रोशनी घोटाला: उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के प्रशासन को कार्रवाई न करने का दिया निर्देश

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के रोशनी घोटाले के लाभान्वितों को फौरी राहत देते हुए प्रशासन को जमीन कब्जा खाली कराने की कार्रवाई न करने का निर्देश दिया। जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि अधिनियम 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की सरकार ने जल विद्युत परियोजनाओं के लिए फंड एकत्रित करने के उद्देश्य से बनाया था।

पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला

न्यायमूर्ति एन वी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि पहले जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय पुनर्विचार याचिकाओं पर अपना फैसला दे दे, उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाये। न्यायालय ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह 21 दिसम्बर को पुनर्विचार याचिकाओं पर निर्णय ले।

जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय

जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी खंडपीठ को भरोसा दिलाया कि जब तक जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय मामले का फैसला नहीं करता, तब तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई कब्जा खाली कराने की कार्रवाई नहीं होगी।

क्या है रोशनी घोटाला ?

जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि अधिनियम 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की सरकार ने जल विद्युत परियोजनाओं के लिए फंड एकत्रित करने के उद्देश्य से बनाया था। इस कानून को ‘रोशनी’ नाम दिया गया था। इसके अनुसार, भूमि का मालिकाना हक उसके अनधिकृत कब्जेदारों को इस शर्त पर दिया जाना था कि वे बाजार भाव पर सरकार को भूमि की कीमत का भुगतान करेंगे। इसके लिए कटऑफ मूल्य 1990 की गाइडलाइन के अनुसार तय किए गए थे। शुरुआत में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले किसानों को कृषि के लिए मालिकाना हक दिया गया।

सीबीआई को मामले की जांच

इस अधिनियम में दो बार संशोधन किए गए, जो मुफ्ती मोहम्मद सईद और गुलाम नबी आजाद की सरकार के कार्यकाल में हुए। उस दौरान कटऑफ मूल्य पहले 2004 और बाद में 2007 के हिसाब से कर दिए गए। 2014 में सीएजी की रिपोर्ट आई, जिसमें खुलासा हुआ कि 2007 से 2013 के बीच जमीन ट्रांसफर करने के मामले में गड़बड़ी हुई। सीएजी रिपोर्ट में दावा किया गया कि सरकार ने 25 हजार करोड़ के बजाय सिर्फ 76 करोड़ रुपये ही जमा कराए। जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। जिसका फैसला आज आया है।

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