सकट चौथ व्रत: संतान की दीर्घायु की कामना करेंगी माताएं, जानें इस व्रत का रहस्य

हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ माह की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का व्रत संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है, इस दिन माताएं निर्जला व्रत रखती हैं

लखनऊ: संतान की लंबी आयु की कामना का पावन पर्व सकट व्रत (Sakat Chauth Vrat) हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ माह की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। आज के दिन माताएं दिनभर निर्जला व्रत रखेंगी और शाम को चंद्रदेव को अर्घ्य देकर श्री गणेश जी की पूजा करेंगी।

इस व्रत को संकष्टी चतुर्थी, वक्रतुंडी चतुर्थी, और तिलकूटा पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने से भगवान जी भी कष्टो से मुक्ती दिलाते हैं। राजधानी लखनऊ में चंद्रदेव रात 8 :26 बजे आसमान में दर्शन देंगे। यह व्रत सर्वमंगलकारी होता है।

गौरी-गणेश की पूजा

इस दिन दिनभर व्रत रखने के बाद व्रती माताएं शाम को चंद्रदेव के आगमन पर दूध का अर्घ्य देकर आराधना करती हैं। माताएं गोबर का गौरी-गणेश बनाकर उनकी पूजा करती है। जिसे साल भर घर में ही रखा जाता है। काला तिल, गन्ना, शकरकंद, गुड़ और घी से माताएं भोग लागाती हैं। इसके बाद माताएं सकट का कथा कहती है।

सकट चौथ व्रत: संतान की दीर्घायु की कामना करेंगी माताएं, जानें इस व्रत का रहस्य
सकट चौथ

व्रत की कथा

कथा में यह होता है कि मां पर्वती स्नान कर रहीं थीं। और अपने पुत्र श्री गणेश जी को पहरेदारी के लिए लगा दिया था तभी भगवान शंकर वहां आते हैं और अंदर जाने की जिद करने लगते हैं। गणेश जी अपनी माता की आज्ञा का पालन करते हुए शंकर जी को अंदर जाने से रोकते हैं तो शंकर जी क्रोधित होकर गणेश जी का सिर काट देते है। यह बात सुनकर माता पार्वती रोने लगती हैं। तब भगवान शंकर, हाथी का सिर लाकर श्री गणेश जी के धड़ से जोड़ देते हैं। उसी दिन के बाद से ही भगवान गणेश जी गजानन कहलाए और उस दिन से संतान की रक्षा के लिए संकष्टी चतुर्थी पर श्री गणेश जी की पूजा होती है। संतान की लंबी उम्र की कामना के लिए माताएं सकट का व्रत रखती हैं।

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